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राम मंदिर की पुनर्स्थापना हुई..अब अयोध्या की गलियों के नाम बदलकर पहले जैसे किए जाएं- BJP नेता डॉ. वेदांती की सरकार से अपील

डॉ. रामविलास वेदांती ने कहा कि जब भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन चुका है और उस पर भगवा ध्वज लहरा रहा है, तो अब यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि रामनगरी की हर निशानी भगवान राम और उनकी परंपराओं से जुड़ी हो.

ayodhya aerial view ram mandir

Ayodhya Streets Name Change: अयोध्या और वाराणसी के ‘इस्लामीकरण’ पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता एवं राम मंदिर आंदोलन के सक्रिय सदस्य रहे डॉ. रामविलास वेदांती (Dr. Ram Vilas Vedanti) ने आज कड़ी आपत्ति जताई. उन्‍होंने केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से स्पष्ट रूप से मांग की है कि जिन-जिन जगहों के नाम इस्‍लामिक शासकों ने बदलवा दिए थे, वे वापस पहले जैसे कर दिए जाएं.

‘तत्‍काल बदल दिए जाएं इन सड़कों-गलियों के नाम’

डॉ. रामविलास वेदांती ने कहा- अयोध्या (Ayodhya) में 500 वर्षों बाद राम मंदिर की पुनर्स्थापना हुई है और उसके शिखर पर भगवा ध्‍वज लहरा रहा है. अब समय है कि अयोध्‍या नगरी की उन सड़कों और गलियों के नाम तत्‍काल बदल दिए जाएं, जिनके नाम मुस्लिम आक्रांताओं पर रखे गए हैं.

वेदांती ने अपनी बात को एक कहावत, “मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है?” के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया. उन्‍होंने कहा- विदेशियों ने हमारे यहां आकर जुल्‍म किए. मंदिर तोड़े और हमारी पहचान-सभ्‍यता को मिटाने का दुस्‍साहस किया. अब अयोध्‍या त्रेता की राह पर है. अब रामनगरी (Ayodhya) की हर निशानी भगवान राम और उनकी परंपराओं से जुड़ी हो.

‘राजा दिलीप, रघु और दशरथ के नाम पर हों गलियां’

डॉ. रामविलास वेदांती ने तर्क दिया कि अयोध्या (Ayodhya) की गलियां भगवान राम से संबंधित या उनके पूर्वजों से संबंधित नामों पर ही होनी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि ये गलियां राजा दिलीप, राजा रघु, और राजा दशरथ जैसे महान इक्ष्वाकु वंश के राजाओं के नाम पर रखी जाएं. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अयोध्या में किसी भी ‘राम विरोधी’ के नाम पर गली का नाम नहीं होना चाहिए. उन्होंने सरकार से निवेदन किया है कि अयोध्या की गलियों की विस्तृत जानकारी मंगवाई जाए और यहां की पौराणिक एवं सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार नामों में बदलाव किए जाएं. वेदांती के अनुसार, वर्तमान में अयोध्या में प्रवेश करने वाला व्यक्ति भ्रमित हो जाता है कि वह कहां आ गया है, जबकि नाम बदलते ही लोगों को तुरंत यह अनुभव होगा कि वे भगवान राम की नगरी में आ चुके हैं.

‘वाराणसी में भी गली-मोहल्लों के नामों में बदलाव हो’

डॉ. रामविलास वेदांती की मांग केवल अयोध्या तक सीमित नहीं है. उन्होंने वाराणसी में भी मोहल्लों के नामों में बदलाव की वकालत की है, जहां के मोहल्ले भी इस्लामीकरण से प्रभावित बताए गए हैं. उन्होंने कहा कि वाराणसी में ‘भोले’ और ‘शिव’ से जुड़े नामों पर गलियों के नाम होने चाहिए.

इसके अलावा, उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों के नाम बदलने की भी मांग की है:

  • आजमगढ़ का नाम बदलकर आर्यनगर किया जाए
  • गाजीपुर का नाम बदलकर विश्वामित्र नगर हो
  • गाजियाबाद का नाम भगवान शंकराचार्य के नाम पर हो
  • बस्ती जिले का नाम गुरु वशिष्ठ नगर हो
  • शाहजहांपुर का नाम परशुरामपुर हो

डॉ. वेदांती ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने सामाजिक सद्भावना को पीछे छोड़कर सामाजिक दुर्भावना पैदा करने वाले काम किए थे, जिससे देश में सामाजिक सद्भाव का कार्य बाधित हुआ.

वाल्मीकि रामायण के अनुसार ऐसी थी अयोध्या

वाल्मीकि रामायण महाकाव्य में, अयोध्या को एक अत्यंत समृद्ध, सुव्यवस्थित और भव्य नगरी के रूप में वर्णित किया गया है, जिसकी स्थापना महाराज मनु ने की थी. यह नगरी सरयू नदी के तट पर बारह योजन लंबी और तीन योजन चौड़ी थी. महर्षि वाल्मीकि के अनुसार, अयोध्या की सड़कें चौड़ी और नियमित थीं, जिन पर हमेशा जल का छिड़काव किया जाता था. यह नगरी विशाल द्वारों, ऊँची अटारियों और दुर्भेद्य प्राचीरों से सुरक्षित थी, जिस कारण इसे ‘देवताओं की नगरी’ के समान माना जाता था.

यहां राज करते थे धर्मपरायण और सत्यवादी राजा

अयोध्या में ऊंचे-ऊंचे महल और मंदिर थे, और यह विभिन्न प्रकार के व्यापारियों, कारीगरों, और ज्ञानियों का केंद्र थी. यहां के निवासी धर्मपरायण, सत्यवादी और राजा दशरथ के प्रति समर्पित थे. कनकदंडक (स्वर्ण का डंडा) नामक एक विशेष दंड (छड़ी) का उल्लेख मिलता है, जो न्याय के प्रतीक के रूप में माना जाता था, तथा रत्नमालाओं से सुसज्जित चौराहों का वर्णन है, जो नगरी की समृद्धि को दर्शाते हैं.

हमेशा फूलों से सजी रहती थीं अयोध्या की गलियां

अयोध्या को हमेशा धर्म, न्याय और शौर्य का केंद्र माना गया है. राजा रघु, दिलीप, और दशरथ जैसे प्रतापी राजाओं की यह राजधानी थी, जहां से उन्होंने समस्त पृथ्वी पर धर्मानुसार शासन किया. नगरी की गलियां हमेशा फूलों से सजी रहती थीं और यहां के उद्यान तथा उपवन मनोरम थे. इस नगरी का वर्णन एक ऐसी आदर्श नगरी के रूप में किया गया है, जहां किसी को कोई दुःख नहीं था, और यह नगरी सभी प्रकार की संपदाओं से परिपूर्ण थी, जो इसे एक पौराणिक तीर्थस्थल का दर्जा देती है.

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