प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न और बलात्कार की शिकार नाबालिग लड़की को अनचाहा गर्भ समाप्त करने की अनुमति दे दी है और कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया और इससे जुड़े सभी खर्चों का वहन राज्य सरकार करेगी.
जिलाधिकारी प्रयागराज को इस आशय का आदेश दिया है.साथ ही सी एम् ओ प्रयागराज को डाक्टरों का पैनल गठित कर अनचाहा गर्भ हटाने का इंतजाम करने का भी आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा पीड़िता व परिवार की इच्छा का सम्मान किया जाय.
यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने दिया है.
न्यायालय के आदेश पर बनी मेडिकल टीम
दुष्कर्म पीड़िता कौशाम्बी की नाबालिग लड़की के मामले में 8 जून, 2025 को एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी. पीड़िता के बरामद होने के बाद पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं. पीड़िता और उसके परिवार ने न्यायालय से चिकित्सकीय गर्भपात की अनुमति मांगी थी.
न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 7 जुलाई, 2025 को प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था. इस बोर्ड में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट और एक मनोचिकित्सक शामिल थे, जिन्होंने 9 जुलाई, 2025 को पीड़िता की जांच की.
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, जांच की तारीख को भ्रूण की गर्भावधि 28 सप्ताह 5 दिन थी. रिपोर्ट में कहा गया कि गर्भावस्था को जारी रखने से याचिकाकर्ता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
हालांकि, बोर्ड ने यह भी बताया कि इस स्तर पर गर्भपात बिना किसी जोखिम के नहीं किया जा सकता और इसमें जटिलताएं तथा सर्जिकल हस्तक्षेप की संभावना बढ़ सकती है. इसके बावजूद, बोर्ड ने पुष्टि की कि पीड़िता और उसके माता-पिता दोनों ने स्वेच्छा से गर्भपात की प्रक्रिया के लिए सहमति दी है.
गर्भपात से इनकार नहीं कर सकता कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट का हवाला
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला देते हुए कहा कि गर्भधारण की आयु अधिक होने के कारण ही गर्भपात से इनकार नहीं किया जा सकता. गर्भवती की प्रजनन स्वायत्तता, गरिमा और निजता के मौलिक अधिकार सर्वोपरि हैं.
विशेष रूप से, बलात्कार के कारण हुई गर्भावस्था को गर्भवती महिला के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर चोट पहुंचाना माना जाता है.
इन सभी बातों पर विचार करते हुए, न्यायालय ने पीड़िता और उसके माता-पिता के निर्णय का सम्मान करते हुए गर्भपात की अनुमति दी. न्यायालय ने प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे विशेषज्ञों की एक टीम गठित करें और आदेश के तीन दिनों के भीतर गर्भपात की प्रक्रिया पूरी करें.
इसके साथ ही, जिला मजिस्ट्रेट, प्रयागराज को भी इस प्रक्रिया में शामिल होने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि पीड़िता और उसके परिवार के सभी चिकित्सा और अन्य खर्च, जिसमें उनकी यात्रा और प्रयागराज में रहने का खर्च भी शामिल है, राज्य द्वारा वहन किया जाए.
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-भारत एक्सप्रेस
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