Sangam Liquor Brand Controversy: उत्तर प्रदेश में आस्था और धार्मिक प्रतीकों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर एक नया और गहरा विवाद खड़ा हो गया है. प्रयागराज की धार्मिक पहचान ‘त्रिवेणी संगम’ के नाम पर रामपुर की एक डिस्टिलरी (शराब कंपनी) ने ‘संगम’ नाम से शराब का ब्रांड लॉन्च कर दिया है. इस कदम ने संत समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत कर दिया है. गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल के पवित्र नाम को शराब जैसी वस्तु से जोड़े जाने पर साधु-संतों में भारी उबाल है और उन्होंने इसे हिंदू धर्म को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश करार दिया है.
‘सनातन परंपराओं पर सीधा प्रहार’ (Prayagraj Triveni Sangam Protest)
श्रृंगवेरपुर पीठाधीश्वर स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि पवित्र धार्मिक प्रतीकों और आस्था से जुड़े नामों का शराब जैसे मादक उत्पादों में इस्तेमाल सीधे तौर पर सनातन परंपराओं का अपमान है. उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि इस मामले में तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए. जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ‘राष्ट्रद्रोह’ जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनकी तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए.
‘जिन्होंने यह दुस्साहस किया, उन्हें सलाखों के पीछे भेजें’
धर्मगुरु पंडित सुशील पाठक ने भी इस हरकत पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा, “संगम हमारे सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ करोड़ों श्रद्धालु आस्था के साथ स्नान करने आते हैं. ऐसे पावन नाम का उपयोग शराब के लिए करना सिर्फ आपत्तिजनक नहीं, बल्कि हिंदू धर्म को बदनाम करने की साजिश है.” पाठक ने दो टूक कहा कि जिस डिस्टिलरी कंपनी के मालिक ने यह दुस्साहस किया है, उसे फौरन सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए.
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सड़कों पर आंदोलन और अनशन की चेतावनी (Rampur distillery Sangam Liquor Brand)
इस मुद्दे पर पूरा संत समाज एकजुट हो गया है. धर्मगुरुओं ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है कि यदि ‘संगम’ नाम वाले इस शराब ब्रांड को तत्काल बाजार से वापस नहीं लिया गया और डिस्टिलरी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशभर में साधु-संत सड़कों पर उतरकर अनशन और बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे. फिलहाल इस पूरे मामले में डिस्टिलरी प्रबंधन या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस बढ़ते धार्मिक आक्रोश को शांत करने के लिए क्या कानूनी कदम उठाती है.
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