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बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट बिल को राज्यपाल की मंजूरी, हर तीन महीने होगी बैठक, जानें नए कानून की अहम बातें

UP News: विधानसभा के मानसून सत्र में श्री बांके बिहारी मंदिर न्यास विधेयक, 2025 पेश किया गया. इसमें न्यासी बोर्ड के गठन का प्रावधान है, जिसमें 11 मनोनीत और 7 पदेन सदस्य होंगे.

UP News: श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट विधेयक, 2025 को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद सोमवार को अधिनियम के रूप में अधिसूचित कर दिया गया. यह विधेयक पहले ही विधानसभा और विधान परिषद से पारित हो चुका था. अब इसके लागू होने के साथ मंदिर प्रबंधन के लिए नया वैधानिक ढांचा अस्तित्व में आ गया है.

सदनों को दी जाएगी जानकारी

विधानसभा के प्रधान सचिव प्रदीप दुबे इस अधिनियम की जानकारी विधानसभा और विधान परिषद दोनों को देंगे. इसके बाद कानून के प्रावधानों के अनुसार प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू होगी.

कानून का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस कानून का मुख्य उद्देश्य मंदिर प्रशासन को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है. श्रद्धालुओं की सुविधाओं में सुधार, संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और व्यवस्था संचालन में स्पष्टता लाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. सरकार ने आश्वासन दिया है कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा.

हाईकोर्ट की टिप्पणी चर्चा में क्यों?

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले मंदिर प्रबंधन पर अध्यादेश को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी. अदालत ने कहा था कि सरकार मंदिर प्रशासन को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है, जो उचित नहीं है. अब जब यह विधेयक कानून बन चुका है तो इसकी कार्यप्रणाली पर सबकी नजरें हैं.

नए कानून में क्या है?

कानून के अनुसार मंदिर से जुड़ा सारा चढ़ावा, दान और चल-अचल संपत्तियां ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में होंगी. इसमें नकद दान, वस्तु रूप में भेंट, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दी गई संपत्ति, बैंक ड्राफ्ट, चेक, आभूषण, हुंडी से प्राप्त धन और अन्य संपत्तियां शामिल होंगी.

सरकार का क्या कहना है?

सरकार का कहना है कि ट्रस्ट का गठन स्वामी हरिदास की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है. धार्मिक रीति-रिवाज, पर्व और उत्सव बिना किसी हस्तक्षेप के जारी रहेंगे. ट्रस्ट दर्शन व्यवस्था तय करेगा, पुजारियों की नियुक्ति करेगा और उनके मानदेय का निर्धारण करेगा. साथ ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी भी ट्रस्ट की होगी.

आधुनिक सुविधाओं की योजना

न्यास के गठन के बाद मंदिर परिसर में भक्तों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देने की योजना है. इसमें प्रसाद वितरण की बेहतर व्यवस्था, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अलग दर्शन मार्ग, पेयजल सुविधा, बैठने के लिए बेंच, प्रवेश और कतार प्रबंधन के लिए कियोस्क, गौशाला, अन्नक्षेत्र, रसोई, होटल, सराय, प्रदर्शनी कक्ष, भोजनालय और प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएं शामिल होंगी.

कैसा होगा न्यास?

न्यास में कुल 18 सदस्य होंगे. इनमें 11 मनोनीत और 7 पदेन सदस्य रहेंगे. मनोनीत सदस्यों में वैष्णव परंपरा से जुड़े संत-विद्वान, सनातन धर्म के प्रतिनिधि और गोस्वामी परंपरा से स्वामी हरिदास जी के वंशज शामिल होंगे. पदेन सदस्यों में मथुरा के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त और अन्य अधिकारी होंगे.

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हर तीन महीने में न्यास की बैठक

न्यास की बैठक हर तीन महीने में होगी. न्यास को 20 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदने का अधिकार होगा, जबकि इससे अधिक राशि के मामलों में सरकार की मंजूरी जरूरी होगी. न्यास का मुख्य कार्यपालक अधिकारी एडीएम स्तर का अधिकारी होगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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