लखीमपुर खीरी/हर्ष गुप्ता: लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्रों में सदियों से अभावों का जीवन जी रहे थारू जनजाति के परिवारों के लिए आज की सुबह एक नई उम्मीद लेकर आई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं पहल करते हुए इस जनजाति के वन टांगिया गांवों और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों को ‘मुख्यधारा’ से जोड़ने का बड़ा कदम उठाया है.
पक्के मकान तक का सफर
लखीमपुर खीरी की पलिया तहसील के चंदन चौकी इलाके में थारू समुदाय के लोग दशकों से वन विभाग की जमीन पर अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे थे. बिजली, पानी और सिर पर पक्की छत उनके लिए एक सपना थी. योगी सरकार ने अब इन परिवारों को स्थायी निवास का अधिकार देकर उनकी सबसे बड़ी चिंता दूर कर दी है. मुख्यमंत्री ने थारू महिलाओं को अपने हाथों से उनके नए घरों की चाबियां सौंपीं.
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महिलाओं के चेहरों पर झलका आत्मविश्वास
भारत एक्सप्रेस के संवाददाता हर्ष गुप्ता ने जब ज़मीनी स्तर पर इन महिलाओं से बात की, तो उनकी आँखों में भविष्य को लेकर एक चमक दिखी. महिलाओं का कहना है अब उन्हें वन विभाग या अतिक्रमण के नाम पर बेदखली का डर नहीं सताएगा. उज्ज्वला योजना, आयुष्मान कार्ड और राशन कार्ड जैसी बुनियादी सुविधाएं अब सीधे उनके दरवाजे तक पहुँच रही हैं. महिलाओं ने खुले तौर पर कहा कि पिछली सरकारों में उन्हें केवल वोट बैंक समझा गया, लेकिन पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने उनके पास आकर उनकी सुध ली है.
सिर्फ आवास नहीं, पहचान का सम्मान
थारू जनजाति को स्थायी आवास मिलना केवल ईंट-गारे की दीवारों का निर्माण नहीं है, बल्कि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने की कोशिश है. मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि थारू संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ उनके बच्चों की शिक्षा और युवाओं के कौशल विकास के लिए विशेष सेंटर खोले जाएंगे.
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