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उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार का बड़ा कदम, 2006 बैच के अधिकारी निलंबित

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया. अब तक 11 अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है.

Aarika Singh Edited by Aarika Singh

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू कर रही है. गुरुवार को राज्य सरकार ने 2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया. यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की सख्त नीति का हिस्सा है.

यह पहला मामला नहीं है, जब किसी आईएएस अधिकारी पर गाज गिरी है. इससे पहले राज्य सरकार ने 11 आईएएस अधिकारियों को निलंबित किया है. इनमें से कई अधिकारी जांच के बाद बहाल भी हो चुके हैं. उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2014 बैच के आईएएस अधिकारी घनश्याम सिंह को लखीमपुर खीरी में खेत की पैमाइश में गड़बड़ी के मामले में 13 नवंबर 2023 को निलंबित किया गया था. हालांकि, उन्हें अब बहाल कर दिया गया है. इसके अलावा, 2012 बैच के आईएएस अधिकारी देवीशरण उपाध्याय को जुलाई 2024 में निलंबित किया गया था. उन पर अलीगढ़ में 35 भूखंडों के पट्टे मनमाने तरीके से बहाल करने का आरोप था.

निलंबन और बहाली का सिलसिला

इसी तरह, 31 मार्च 2022 को सोनभद्र के डीएम टीके शीबू को भी निलंबित किया गया था, लेकिन अब वह ड्यूटी पर लौट चुके हैं. इसी तरह, सुनील कुमार वर्मा को पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया था, लेकिन अब उन्हें भी बहाल कर दिया गया है.

2011 बैच के आईएएस अधिकारी देवेंद्र कुमार पांडेय को उन्नाव में डीएम पद पर रहते हुए वित्तीय अनियमितता के आरोपों के चलते निलंबित किया गया था, लेकिन अब वह भी बहाल हो चुके हैं. इसी बैच के अमरनाथ उपाध्याय, जिन्हें गोसंरक्षण केंद्रों के बजट में गड़बड़ी करने के आरोप में निलंबित किया गया था, उन्हें भी सरकार के आदेश के बाद बहाल किया गया है.

संपूर्ण कार्यवाही में योगी सरकार का उद्देश्य

यह निलंबन और बहाली का सिलसिला योगी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है. राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी अधिकारी द्वारा भ्रष्टाचार की पुष्टि होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही, योगी सरकार ने यह भी दिखाया है कि जांच के बाद अधिकारी यदि निर्दोष पाए जाते हैं तो उन्हें बहाल भी किया जाएगा.

अब तक कई अधिकारी सस्पेंड होने के बाद वापस बहाल हो चुके हैं, और यह योगी सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े रुख को दर्शाता है. यह कार्रवाई राज्य में अधिकारियों को यह संदेश देने के लिए की गई है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. योगी सरकार का यह कदम राज्य की प्रशासनिक प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

-भारत एक्सप्रेस



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