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Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
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भारत में हिंदू धार्मिक पुस्तकों के सबसे बड़े केंद्र गीता प्रेस के बारे में आप कितना जानते हैं…

गीता प्रेस ने धार्मिक ग्रंथों के अलावा छोटी-छोटी पुस्तिकाओं का भी प्रकाशन किया है. इन पुस्तकों का उद्देश्य लोगों को हिंदू धर्म और संस्कृति की शिक्षा देना है.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित गीता प्रेस का नाम धार्मिक और सांस्कृतिक जगत में किसी पहचान का मोहताज नहीं है. यह संस्था श्रीमद्भागवद गीता समेत हिंदू धर्म के कई प्रमुख ग्रंथों के प्रचार-प्रसार के लिए जानी जाती है. गीता प्रेस ने इन ग्रंथों को न केवल बड़े पैमाने पर प्रकाशित किया है, बल्कि बेहद सस्ती कीमत पर आम जनता तक पहुंचाया है.

गीता प्रेस की स्थापना 1923 में हुई थी. इसे श्रीराम शर्मा आचार्य ने शुरू किया था. उनका उद्देश्य था कि भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक साहित्य हर घर तक पहुंचे. इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए गीता प्रेस ने सबसे पहले श्रीमद्भागवद गीता को बहुत कम कीमत पर प्रकाशित करना शुरू किया.

श्रीमद्भगवद गीता का घर-घर प्रसार

गीता प्रेस ने न केवल गीता बल्कि रामायण, महाभारत, उपनिषद और पुराणों जैसी कई धार्मिक पुस्तकों को भी प्रकाशित किया है. इन ग्रंथों को हिंदी, संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं में छापा गया है ताकि हर भाषा के लोग इन्हें पढ़ सकें.

अब तक गीता प्रेस ने 40 लाख से ज्यादा गीता की प्रतियां प्रकाशित की हैं. भारत ही नहीं, विदेशों में भी इसकी गीता के संस्करण काफी लोकप्रिय हैं. इसकी सरल भाषा और किफायती कीमत ने इसे हर वर्ग के लिए सुलभ बनाया है.

गीता प्रेस की किताबें अपनी सस्ती कीमत और व्यापक वितरण के कारण हर घर में जगह बना चुकी हैं. यह न केवल शहरों बल्कि गांवों तक भी आसानी से उपलब्ध हैं. गीता प्रेस का मानना है कि धार्मिक शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए, और इसी विचार के आधार पर वे अपनी किताबों का प्रकाशन करते हैं.

हिंदू धर्म का प्रचार मुख्य उद्देश्य

गीता प्रेस ने धार्मिक ग्रंथों के अलावा छोटी-छोटी पुस्तिकाएं भी प्रकाशित की हैं. इनका उद्देश्य हिंदू धर्म और संस्कृति को सरल और रोचक तरीके से लोगों तक पहुंचाना है. हर साल लाखों किताबें और पुस्तिकाएं देश के कोने-कोने में पहुंचाई जाती हैं, जिससे हजारों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं.

गीता प्रेस ने पिछले 100 वर्षों में भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक साहित्य को नई ऊंचाई दी है. यह संस्था आज भी धार्मिक ग्रंथों के प्रचार-प्रसार में सबसे आगे है.

-भारत एक्सप्रेस



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