5 सितंबर 1972 को जर्मनी के म्यूनिख में चल रहे ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में एक ऐसी घटना हुई, जिसने दुनिया को स्तब्ध कर दिया. खेलों के महाकुंभ में फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन ब्लैक सितंबर (Black September) के 8 आतंकियों ने इजरायली टीम के आवास पर हमला कर दिया. इस हमले में इजरायल के 11 खिलाड़ी और कोच मारे गए. यह घटना आधुनिक आतंकवाद के इतिहास में एक काला अध्याय बन गई.
घटना कैसे हुई?
सुबह करीब 4:30 बजे ट्रैक सूट पहने 8 आतंकी ओलंपिक विलेज की दीवार फांदकर घुस आए. उनके पास अटैक राइफलें, पिस्तौल और ग्रेनेड थे. उन्होंने कॉनॉलीस्ट्रासे 31 में इजरायली टीम के अपार्टमेंट पर हमला किया.
पहले हमले में कुश्ती कोच मोशे वेनबर्ग और वेटलिफ्टर योसेफ रोमानो शहीद हो गए. रोमानो ने आतंकियों से भिड़ने की कोशिश की थी. बाकी 9 खिलाड़ियों और कोचों को बंधक बना लिया गया. आतंकियों ने इजरायल से 234 फिलिस्तीनी कैदियों (कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 236 या अधिक बताई गई) और दो जर्मन आतंकियों की रिहाई की मांग की.
पूरी दुनिया टीवी पर इस घटना को लाइव देख रही थी. जर्मन पुलिस ने बातचीत की कोशिश की, लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर ने आतंकियों से समझौता करने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा था कि इजरायल आतंकवादियों के सामने नहीं झुकेगा.
फुर्स्टेनफेल्डब्रुक एयरबेस पर हत्याकांड
रात में आतंकियों को बंधकों के साथ दो हेलीकॉप्टरों में फुर्स्टेनफेल्डब्रुक एयरबेस ले जाया गया. वहां जर्मन पुलिस ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन योजना पूरी तरह विफल रही. सुरक्षा बल तैयार नहीं थे, नाइट विजन नहीं था और आतंकियों की सही संख्या भी पता नहीं थी.
गोलीबारी में सभी 9 बंधक मारे गए. कुछ को गोलियों से और एक को धुएं से मौत हुई. 8 आतंकियों में से 5 मारे गए और 3 गिरफ्तार हुए. एक जर्मन पुलिस अधिकारी भी शहीद हो गए. कुल 17 लोगों की मौत हुई.
शुरुआत में मीडिया ने गलत खबर दी कि बंधक बच गए हैं, लेकिन कुछ घंटों बाद सच्चाई सामने आई- ‘They’re all gone.’
इजरायल का जवाब: ऑपरेशन ‘रेथ ऑफ गॉड’
इस घटना के बाद इजरायल में गहरा आक्रोश फैल गया. प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर ने मोसाद को आदेश दिया कि जो भी इस हमले में शामिल थे, उन्हें खोजकर सजा दी जाए. इस गुप्त अभियान का नाम ऑपरेशन रेथ ऑफ गॉड (Operation Wrath of God) रखा गया.
मोसाद ने एक लिस्ट बनाई जिसमें हमले के योजनाकारों और ब्लैक सितंबर के सदस्यों के नाम थे. सालों तक एजेंट्स यूरोप और मध्य पूर्व में सक्रिय रहे. कई आतंकियों को चुपके से निशाना बनाया गया. इनमें प्रमुख नाम शामिल थे:
- रोम में वाएल जुवैटर
- पेरिस में महमूद हमशारी
- और कई अन्य
तीन गिरफ्तार आतंकियों को कुछ हफ्तों बाद एक जर्मन विमान अपहरण के बदले छोड़ दिया गया था. बाद में उनमें से कुछ को भी मोसाद ने निशाना बनाया. यह अभियान कई सालों तक चला और इसे इजरायल की आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति का प्रतीक माना जाता है.
घटना का असर
म्यूनिख नरसंहार ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया. ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में सुरक्षा कड़ी हो गई. जर्मनी में जीएसजी-9 जैसी विशेष आतंकवाद रोधी इकाई बनी, जिससे प्रेरणा लेकर भारत में NSG का गठन हुआ.
यह घटना याद दिलाती है कि आतंकवाद खेल, शांति और मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है. 11 इजरायली खिलाड़ियों की याद में हर साल श्रद्धांजलि दी जाती है. उनके नाम आज भी ओलंपिक इतिहास में अमर हैं.
शहीद खिलाड़ी और कोच:
मोशे वेनबर्ग, योसेफ रोमानो, डेविड बर्गर, जेव फ्रीडमैन, एलीएजर हाल्फिन, मार्क स्लाविन, अमित्जुर शापिरा, केहाट शोर, आंद्रे स्पिट्जर, याकोव स्प्रिंगर और योसेफ गुटफ्रायंड.
यह घटना सिर्फ एक हमला नहीं थी, बल्कि एक चेतावनी थी कि आतंकवाद कहीं भी, कभी भी सिर उठा सकता है. और इजरायल ने दिखा दिया कि अपने नागरिकों की हत्या का बदला वह कभी नहीं भूलता.
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-भारत एक्सप्रेस
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