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दो बार मिली आजादी, तीन राज्यों में फैला साम्राज्य, जानिए भारत के ‘मिनी फ्रांस’ की अनोखी दास्तान

पुडुचेरी भारत का एक अनोखा केंद्र शासित प्रदेश है, जिसे मिनी फ्रांस भी कहा जाता है क्योंकि यहां आज भी फ्रांसीसी संस्कृति, वास्तुकला और परंपराओं के निशान दिखाई देते हैं.

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में चुनाव संपन्न हो चुके हैं, अब सबकी निगाहें 4 को आनेवाले नतीजे पर केंद्रित है. भारत की विविधता और उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष का एक अनुपम उदाहरण है पुडुचेरी. यह देश का एकमात्र ऐसा केंद्रशासित प्रदेश है, जिसने दो बार स्वतंत्रता हासिल की और जिसकी सीमाएं तीन अलग-अलग राज्यों में बिखरी हुई हैं. इसे ‘मिनी फ्रांस’ भी कहा जाता है, क्योंकि यहां फ्रांसीसी संस्कृति, वास्तुकला और परंपराएं आज भी जीवंत हैं.

दो बार स्वतंत्रता दिवस क्यों?

दो बार स्वतंत्रता का जश्न मनाया जाता है:

  • 15 अगस्त — पूरे भारत की तरह ब्रिटिश उपनिवेशवाद से आजादी (1947).
  • 1 नवंबर — लिबरेशन डे या डे फैक्टो मर्जर डे (1954), जब फ्रांसीसी शासन से व्यावहारिक मुक्ति मिली.

इसके अलावा, 16 अगस्त को डे ज्यूरे ट्रांसफर डे के रूप में भी याद किया जाता है, जब 1962 में कानूनी रूप से फ्रांस ने इन इलाकों को भारत को सौंपा.

फ्रांसीसी गुलामी की कहानी

17वीं सदी में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी ने पुडुचेरी में अपना पहला व्यापारिक अड्डा स्थापित किया. ब्रिटिश और फ्रांसीसी के बीच कई युद्धों के बावजूद, 1814-16 की संधियों के बाद फ्रांस को चार एन्क्लेव रखने की अनुमति मिल गई — पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यानम. जबकि बाकी भारत ब्रिटिश राज के अधीन हो गया, ये चार जगहें लगभग 280 साल तक फ्रेंच इंडिया का हिस्सा बनी रहीं.

1954 का ऐतिहासिक जनमत संग्रह

18 अक्टूबर 1954 को पुडुचेरी के कीझूर गांव में एक यादगार घटना घटी. फ्रांसीसी प्रशासन ने 178 चुने हुए प्रतिनिधियों (म्यूनिसिपल काउंसिलर्स और असेंबली सदस्यों) की वोटिंग कराई. इनमें से 170 ने भारत में विलय के पक्ष में मत दिया.

पप्पा गौबार्ट (एडौर्ड गौबार्ट) जैसे स्थानीय नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही. तीन दिन बाद, 21 अक्टूबर 1954 को दिल्ली में भारत और फ्रांस के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत 1 नवंबर 1954 को फ्रांसीसी इलाकों का डे फैक्टो (व्यावहारिक) हस्तांतरण भारत को कर दिया गया.

हालांकि, कानूनी (डे ज्यूरे) प्रक्रिया में 8 साल लग गए. मई 1956 में सेशन की संधि पर हस्ताक्षर हुए और फ्रांसीसी संसद ने मई 1962 में इसे मंजूरी दी. अंततः 16 अगस्त 1962 को फ्रांस ने पूर्ण संप्रभुता भारत को सौंप दी. 1 जुलाई 1963 से इसे केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिला.

तीन राज्यों में फैली सीमाएं

पुडुचेरी एक नहीं, बल्कि चार अलग-अलग इलाकों से मिलकर बना है, जो आपस में जुड़े नहीं हैं:

  • पुडुचेरी और कराईकल — तमिलनाडु राज्य के अंदर एन्क्लेव के रूप में.
  • माहे— केरल राज्य के अंदर (मालाबार तट पर).
  • यानम— आंध्र प्रदेश राज्य के अंदर (कोरोमंडल तट पर).

कुल क्षेत्रफल मात्र 483 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन ये भौगोलिक रूप से बिखरे हुए होने के कारण इसे अनोखा बनाते हैं. जनसंख्या लगभग 14 लाख (2011 सेंसस) है.

फ्रांसीसी विरासत आज भी जिंदा

‘व्हाइट टाउन’ के नाम से मशहूर पुडुचेरी का फ्रेंच क्वार्टर अपनी चौड़ी सड़कों, पीले रंग की औपनिवेशिक इमारतों, चर्चों और क्रोइसां जैसी फ्रेंच व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है. कुछ स्थानीय लोगों के पास आज भी फ्रेंच नागरिकता या पासपोर्ट है. यहां फ्रेंच भाषा और संस्कृति के निशान आसानी से दिख जाते हैं.

राजनीतिक व्यवस्था

पुडुचेरी में 30 सदस्यीय विधानसभा है, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण लेफ्टिनेंट गवर्नर की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है. पुडुचेरी भारत की एकता और विविधता का जीवंत प्रतीक है. जहां एक ओर यह ब्रिटिश और फ्रांसीसी दोनों उपनिवेशवाद से मुक्ति की कहानी सुनाता है, वहीं दूसरी ओर अपनी अनोखी भौगोलिक संरचना और सांस्कृतिक मिश्रण से देश की समृद्ध विरासत को दर्शाता है.

यह भी पढ़े: आरक्षण तो मिल गया, पर ‘आज़ादी’ कब? चलम की किताब से पीएम मोदी के संकल्प तक का सच

-भारत एक्सप्रेस



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