World Wide Web Day: 6 अगस्त 1991 की तारीख तकनीक की दुनिया में एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आई थी. इसी दिन स्विट्जरलैंड स्थित सर्न (CERN) प्रयोगशाला में वैज्ञानिक टिम बर्नर्स-ली ने वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) को आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया. उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छोटी-सी शुरुआत आने वाले वर्षों में पूरी दुनिया के काम करने, सीखने और जुड़ने के तरीके को बदल देगी.
आज हम जिस इंटरनेट का इस्तेमाल रोजाना करते हैं, उसकी नींव इसी वेब पर रखी गई थी. हालांकि, टिम बर्नर्स-ली का मानना है कि वेब अभी भी उस रूप तक नहीं पहुंच पाया है, जिसकी उन्होंने कल्पना की थी. उनका कहना है कि भविष्य का वेब और भी ज्यादा खुला, सुरक्षित और लोगों के नियंत्रण में होना चाहिए.
पहली वेबसाइट से शुरू हुई डिजिटल क्रांति
दुनिया की पहली वेबसाइट का नाम था info.cern.ch. यह वेबसाइट आज के चमकदार और इंटरैक्टिव वेब पेजों से बिल्कुल अलग थी. इसमें ना कोई तस्वीर थी, ना वीडियो, ना विज्ञापन और ना ही सोशल मीडिया के बटन. इसका पहला पेज सिर्फ 153 शब्दों का था, जिसमें लोगों को वर्ल्ड वाइड वेब क्या है और इसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, इसकी जानकारी दी गई थी.
यही साधारण-सा पेज आगे चलकर एक ऐसी डिजिटल क्रांति की शुरुआत बना, जिसने जानकारी को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने का रास्ता खोल दिया.
वर्ल्ड वाइड वेब नाम रखने से पहले टिम बर्नर्स-ली ने कई दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया था. इनमें “Information Mesh”, “The Information Mine” और “Mine of Information” जैसे नाम शामिल थे. लेकिन आखिरकार उन्होंने “World Wide Web” नाम चुना. यह नाम इंटरनेट के उस विचार को दर्शाता था, जिसमें दुनिया भर की जानकारियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हों.
कुछ ही वर्षों में यह नाम इतना लोकप्रिय हो गया कि यह आधुनिक जीवन का हिस्सा बन गया.
एक वेबसाइट से अरबों तक का सफर
जब 1991 में वेब की शुरुआत हुई थी, तब दुनिया में केवल एक वेबसाइट मौजूद थी. लेकिन आज वेबसाइटों की संख्या अरबों में पहुंच चुकी है. वेब ने शिक्षा, कारोबार, स्वास्थ्य सेवाओं, मनोरंजन और सामाजिक संपर्क के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है.
अब लोग घर बैठे पढ़ाई कर सकते हैं, ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं, दुनिया के किसी भी हिस्से की खबर तुरंत हासिल कर सकते हैं और अपने विचार लाखों लोगों तक पहुंचा सकते हैं.
टिम बर्नर्स-ली को मिला बड़ा सम्मान
टिम बर्नर्स-ली के योगदान को दुनिया ने भी पहचाना. साल 2004 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया. यह सम्मान केवल एक तकनीकी आविष्कार के लिए नहीं था, बल्कि उस खुले और स्वतंत्र वेब की सोच के लिए भी था, जिसे उन्होंने हमेशा आगे बढ़ाया.
वेब का अगला दौर कैसा होगा?
आज वेब हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन टिम बर्नर्स-ली अभी भी इसे बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर देते हैं. उनका सपना है कि आने वाला वेब ज्यादा विकेंद्रीकृत हो, जहां लोगों की निजता सुरक्षित रहे और उपयोगकर्ताओं का अपने डेटा पर अधिक नियंत्रण हो.
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-भारत एक्सप्रेस
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