अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच से पाकिस्तान के लिए एक ऐसी खौफनाक और रणनीतिक टेंशन देने वाली खबर (Russia-Taliban Defense Agreement) सामने आई है, जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय तक हड़कंप मचा दिया है. एक तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भारत और तालिबान के खिलाफ जहर उगल रहे थे, ठीक उसी समय रूस की धरती पर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और तालिबान ने मिलकर पाकिस्तान की ऐसी तगड़ी फील्डिंग सेट कर दी कि पाकिस्तान खुद के बुने चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस गया है.
दरअसल रूस में आयोजित पहले इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम में जहां डोभाल ने आतंकवाद पर दहाड़ा, वहीं दूसरी तरफ रूस और तालिबान के बीच हुए एक गुप्त रक्षा समझौते ने पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी है.
मॉस्को के मंच से डोभाल की हुंकार
दरअसल, पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की वर्षगांठ पर शहबाज शरीफ ने गीदड़भभकी देते हुए आरोप लगाया था कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार भारत के इशारों पर पाकिस्तान के खिलाफ काम कर रही है. लेकिन जिस वक्त शहबाज यह रोना रो रहे थे, उसी वक्त मॉस्को पहुंचे NSA अजीत डोभाल ने 120 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों के सामने पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया.
डोभाल ने बिना नाम लिए दोटूक लहजे में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अब कोई ‘दोहरा मापदंड’ नहीं चलेगा और जिम्मेदार देशों को तय करना होगा कि वे आतंकवाद के प्रायोजकों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेंगे या नहीं. इस कूटनीतिक प्रहार से दुनिया के सामने शहबाज शरीफ के खोखले दावों की धज्जियां उड़ गईं.
पुतिन और तालिबान के बीच हुई डिफेंस डील(Russia-Taliban Defense Agreement)
पाकिस्तान के लिए असली और सबसे बड़ा झटका अफगानिस्तान से आया है. ‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और तालिबान के बीच एक बड़ा सैन्य सहयोग समझौता हुआ है. जुलाई 2025 में तालिबान सरकार को मान्यता देने वाले रूस ने अब उसे सैन्य रूप से मजबूत करने का फैसला किया है.
पिछले कई महीनों से पाकिस्तान की एयरफोर्स आतंकवाद के नाम पर अफगानिस्तान की सीमा के अंदर घुसकर हवाई हमले कर रही थी, जिससे बौखलाए तालिबानी रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब ने रूस से आधुनिक ‘एयर डिफेंस सिस्टम’ और रडार तकनीक की मांग की है. तालिबान अब रूस की मदद से अपनी हवाई सीमाओं को इतना अभेद्य बनाना चाहता है कि दोबारा कोई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान वहां घुसने की जुर्रत न कर सके.
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पाकिस्तान का रणनीतिक फायदा हमेशा के लिए खत्म
अब तक पाकिस्तान को अफगानिस्तान पर यह बड़ा रणनीतिक फायदा था कि अफगान सेना के पास कोई आधुनिक हवाई सुरक्षा तंत्र नहीं था. लेकिन अगर रूस ने तालिबान को अपने पुराने लेकिन घातक मिग, सुखोई फाइटर जेट या पैंटसिर और S-400 जैसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम दे दिए, तो पूरा गेम पलट जाएगा.
तालिबान इतिहास में पहली बार किसी वैश्विक महाशक्ति के साथ औपचारिक रक्षा साझेदारी (Russia-Taliban Defense Agreement) बना रहा है. रूस के इस कदम से न सिर्फ पाकिस्तान का गुरूर टूटेगा, बल्कि डूरंड लाइन पर जारी झड़पों के बीच अब पाकिस्तान के लिए अफगानिस्तान के अंदर सर्जिकल स्ट्राइक करना अपनी तबाही को दावत देने जैसा होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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