balochistan Crisis: बलूच नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को खुला पत्र लिखकर चीन के खतरनाक प्लान का खुलासा किया है. उन्होंने बताया है कि चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर सकता है। यह भारत के लिए भी बड़ा खतरा है. मीर यार ने भारत और बलूचिस्तान के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र करते हुए ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की. साथ ही आजादी समर्थक बलों को मजबूत करने की गुहार लगाई. यह पत्र नए साल 2026 के मौके पर लिखा गया है. बलूचिस्तान के 6 करोड़ लोग भारत से ठोस सहयोग चाहते हैं.
चीन का मिलिट्री प्लान भारत के लिए खतरा?
मीर यार ने चेतावनी देते हुए पत्र में लिखा कि अगर बलूचिस्तान की आजादी समर्थक ताकतों को मजबूत नहीं किया गया तो चीन कुछ महीनों में सैनिक तैनात कर देगा. उन्होंने कहा कि 6 करोड़ बलूच लोगों की इच्छा के बिना चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के लिए अकल्पित खतरा होगी। CPEC पहले से ही PoK से गुजरता है. अब अफगानिस्तान तक फैलने से भारत और घिर जाएगा। मीर यार ने भारत से ठोस सहयोग की अपील करते हुए कहा कि दोनों देशों के सामने एक समान खतरे हैं.
पत्र में भारत से ऐतिहासिक रिश्ते का जिक्र
मीर यार बलूच ने पत्र की शुरुआत नए साल की बधाई से की। उन्होंने खुद को रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का प्रतिनिधि बताते हुए भारत के 140 करोड़ लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा कि भारत और बलूचिस्तान के गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं. हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) इन संबंधों का प्रतीक के साथ ही यह हमारी साझा विरासत है। साथ ही मीर यार ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि भारत ने आतंक के खिलाफ साहसिक कदम उठाया है.
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पाकिस्तान के कब्जे पर क्या लिखा?
मीर यार ने लिखा कि बलूचिस्तान के लोगों ने 69 साल से पाकिस्तान के कब्जे को झेला है। प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकारों के अत्याचार सहन किए हैं. अब समय आ गया है कि इस नासूर को जड़ से खत्म किया जाए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन का रणनीतिक गठबंधन खतरनाक है. चीन ने CPEC को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है. यह (balochistan Crisis) बलूचिस्तान की आजादी के लिए सबसे बड़ा खतरा है.
भारत का रुख क्या है?
बता दें कि भारत हमेशा से CPEC का विरोध करता रहा है क्योंकि यह PoK से गुजरता है. भारत कहता आया है कि PoK उसका हिस्सा है जिसको चीन नहीं मानता. अब अफगानिस्तान के साथ मिलकर CPEC का विस्तार भारत के लिए नई चुनौती है. हालांकि मीर यार ने पत्र के अंत में उम्मीद जताते हुए यह भी लिखा कि भारत और बलूचिस्तान के बीच सहयोग से दोनों मजबूत होंगे. बलूचिस्तान की आजादी और भारत की सुरक्षा एक साथ जुड़ी है. यह पत्र भारत के लिए सोचने का मौका है.
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-भारत एक्सप्रेस
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