Mehul Choksi Extradition: बेल्जियम की एंटवर्प कोर्ट द्वारा मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण को दी गई मंजूरी भारत सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता है, जो यह साबित करती है कि भारत का प्रत्यर्पण अनुरोध कानूनी रूप से मजबूत है. हालांकि, अधिकारियों के अनुसार, चोकसी के पास अभी भी ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प मौजूद है, जिसका अर्थ है कि उसे तुरंत भारत नहीं लाया जाएगा. हालांकि, चोकसी पिछले चार महीने से जमानत के लिए संघर्ष कर रहा था. अब उसके पास और भी कानूनी विकल्प अब सीमित होते जा रहे हैं.
मोहुल चोकसी (Mehul Choksi) और उसका भांजा नीरव मोदी, दोनों ही पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मामले में भारत में वांटेड हैं. सूत्रों के अनुसार, अदालत ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को सही ठहराते हुए एक प्रारंभिक आदेश जारी किया है. एंटवर्प (बेल्जियम) की एक अदालत ने यह आदेश दिया और उसकी गिरफ्तारी को भारत के अनुरोध के आधार पर वैध करार दिया है. यह फैसला भारत के लिए चोकसी को वापस लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
यहां फंस सकता है पेंच
अधिकारियों के अनुसार चोकसी के पास अभी ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प मौजूद है. एक अधिकारी ने कहा, “इसका मतलब है कि वह तुरंत भारत नहीं लाया जाएगा, लेकिन प्रक्रिया का पहला और बहुत अहम चरण पार हो गया है. अब उसके पास और भी कानूनी विकल्प कम होते जा रहे हैं.
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एंटवर्प पुलिस ने किया था गिरफ्तार
65 वर्षीय मेहुल चोकसी को 11 अप्रैल को एंटवर्प पुलिस ने सीबीआई के प्रत्यर्पण अनुरोध पर गिरफ्तार किया था. वह पिछले चार महीने से बेल्जियम की जेल में बंद है. चोकसी ने कई अदालतों में जमानत के लिए याचिकाएं दायर कीं, लेकिन हर बार उसकी याचिका खारिज कर दी गई. अब एंटवर्प कोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय पक्ष की ओर से बेल्जियम के अभियोजकों और चोकसी की कानूनी टीम की दलीलें सुनीं. अदालत ने माना कि भारत का प्रत्यर्पण अनुरोध और चोकसी की गिरफ्तारी वैध है.
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