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चीन चल रहा कैसी चाल? 23 महीनों से धड़ाधड़ भर रहा है सोना

चीन लगातार 23 महीनों से धड़ल्ले से सोना खरीद रहा है, जिससे उसका कुल गोल्ड रिजर्व 2,410 टन पहुंच गया है. डॉलर पर निर्भरता घटाने और युआन को बढ़ावा देने के लिए ड्रैगन की यह बड़ी चाल है.

China Gold Reserves Reaches 2410 Tons Strategy Against US Dollar

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China Gold Reserves: दुनिया भर में सोने को सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इन दिनों चीन जिस रफ्तार से सोना खरीद रहा है, उसने ग्लोबल मार्केट में एक नई चर्चा छेड़ दी है. चीन का कुल गोल्ड रिजर्व अब बढ़कर 2,410 टन पर पहुंच चुका है. चौंकाने वाली बात यह है कि चीन का सेंट्रल बैंक पिछले 23 महीनों से लगातार हर महीने अपने खजाने में सोना जोड़ रहा है. अकेले सितंबर महीने की बात करें, तो चीन ने 23 टन सोना खरीदा है, जो अक्टूबर 2023 के बाद से किसी एक महीने में की गई सबसे बड़ी खरीदारी है. आखिर ड्रैगन की इस सोने की भूख के पीछे का असली खेल क्या है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.

डॉलर्स से किनारा और गोल्ड पर भरोसा

आर्थिक जानकारों का मानना है कि चीन इस रणनीति के जरिए अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना चाहता है. अमेरिका पर लगातार भारी कर्ज बढ़ रहा है और उसकी अर्थव्यवस्था के हालात भी किसी से छिपे नहीं हैं. ऐसे में डॉलर जैसी विदेशी मुद्रा में पैसा रखने के मुकाबले सोना रखना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि सोना किसी एक देश की सरकार या उसकी देनदारी पर निर्भर नहीं होता.

इसके अलावा, चीन हांगकांग को फिजिकल गोल्ड की ट्रेडिंग और पेमेंट सेटलमेंट का बहुत बड़ा ग्लोबल हब बनाने में जुटा है. अगर भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का कारोबार डॉलर की बजाय चीनी करेंसी ‘युआन’ में होने लगे, तो ग्लोबल ट्रेड में चीन का दबदबा और ज्यादा मजबूत हो जाएगा. यही वजह है कि सेंट्रल बैंक ताबड़तोड़ खरीदारी कर रहा है.

जनता में भी सोने का क्रेज

सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि आम चीनी नागरिक भी धड़ल्ले से सोने में निवेश कर रहे हैं. यही वजह है कि सितंबर महीने में चीन के गोल्ड ईटीएफ (ETF) में 11 टन सोना और जुड़ गया, जिससे इनकी कुल होल्डिंग रिकॉर्ड 304 टन तक पहुंच गई है. हालांकि, दूसरी तरफ सोने के ऊंचे दामों के कारण बाजार में ज्वैलरी या गहनों की मांग में करीब 21 फीसदी की भारी गिरावट भी दर्ज की गई है.

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रातों-रात डॉलर का ग्लोबल दबदबा खत्म नहीं होने वाला, लेकिन चीन जिस तरह से अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सोने में बदल रहा है, वह आने वाले समय की ग्लोबल इकोनॉमी के लिए एक बड़ा संकेत जरूर है.

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-भारत एक्सप्रेस



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