अमेरिकी राजनीति में हमेशा सुर्खियों में रहने वाली डेमोक्रेटिक सांसद ‘इल्हान उमर’ और पूर्व राष्ट्रपति ‘डोनाल्ड ट्रंप’ के बीच एक बार फिर विवाद बढ़ गया है. ट्रंप ने सोमालियाई मूल की सांसद पर तीखी टिप्पणियां की हैं, जिसमें उन्होंने इल्हान के अमेरिका आने और नागरिकता पाने के तरीके पर कटाक्ष किया. उनके इस ताजा बयान ने दोनों के बीच बढ़ते तनाव को फिर से उजागर कर दिया है.
ट्रंप की तीखी टिप्पणी
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Truth Social’ पर इल्हान उमर को निशाना बनाते हुए लिखा कि “अमेरिका की नागरिकता पाने के लिए उन्होंने अपने भाई से शादी की और अब हमें बता रही हैं कि अमेरिका कैसे चलाया जाए.” उन्होंने इसे अमेरिकी राजनीति के लिए खतरा मानते हुए इल्हान को “स्कम (SCUM)” जैसे शब्दों से भी संबोधित किया. ट्रंप ने यह भी कहा कि सोमालिया, इल्हान का जन्मस्थान, गरीबी, गृहयुद्ध, भ्रष्टाचार और आतंकवाद से जूझ रहा है, और ऐसे हालात के बावजूद वह अमेरिका को चलाने के निर्देश देती हैं.

क्या है विवाद की जड़?
ट्रंप और उमर के बीच तनाव वैचारिक मतभेदों से शुरू हुआ था. इल्हान उमर ने ट्रंप की प्रवास-विरोधी नीतियों, जैसे ट्रैवल बैन और शरणार्थी कार्यक्रमों के निलंबन, की आलोचना की थी. ट्रंप इसे उनके यहूदी-विरोधी और राष्ट्र विरोधी रुख के रूप में देखते हैं. 2019 में ट्रंप ने इल्हान को वापस अपने देश जाने की सलाह दी थी, उनके मुस्लिम पहचान और सोमाली मूल को लेकर. अब ताजा टिप्पणियों के बाद यह विवाद और गहराया है.
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इल्हान उमर की प्रतिक्रिया और अमेरिका में उनका सफर
इल्हान उमर स्वयं 1995 में अमेरिका आई थीं और 5 साल बाद वर्ष 2000 में अमेरिकी नागरिक बनीं. मिनेसोटा के 5वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सदस्य इल्हान ने ट्रंप के समर्थन और हिंसा भड़काने वाले रुख को कई मौकों पर आलोचना की है. हालांकि, ट्रंप समर्थकों और रिपब्लिकन नेताओं ने इल्हान की टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाया है. राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद आगामी चुनावों में भी सुर्खियों में रहेगा, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच विचारधारात्मक टकराव लगातार जारी है.
अमेरिका और वैश्विक राजनीति में इसका असर
इल्हान उमर का विरोध और ट्रंप की आलोचना अमेरिकी राजनीतिक दलों के भीतर गहरी असहमति को दर्शाती है. इसके अलावा, उनका भारत विरोधी रुख और कश्मीर पर बयान अमेरिकी-भारतीय संबंधों पर भी चर्चा का विषय बनता रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने दिखा दिया कि अमेरिकी संसद में आने वाले नेताओं की पहचान, धर्म और मूल देश भी राजनीतिक बहस और विवाद का हिस्सा बन सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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