अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पूरी दुनिया को एक बड़ी चेतावनी जारी की है. IMF का कहना है कि यदि यह युद्ध और लंबा खींचता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा झटका लग सकता है. इससे दुनिया भर में कच्चे तेल का एक अभूतपूर्व संकट खड़ा हो सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की धकेल सकता है.
आपूर्ति से प्रभावित होगा वैश्विक तेल और गैस
अपनी नवीनतम ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट में IMF ने कहा है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसा महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बंद होता है या प्रमुख ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचता है, तो वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी.
रिपोर्ट में अलग-अलग परिस्थितियों का जिक्र किया गया है:
राहत भरा परिदृश्य: यदि युद्ध जल्द समाप्त हो जाता है और साल के मध्य तक ऊर्जा बाजार स्थिर हो जाते हैं, तब भी 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर धीमी होकर लगभग 3.1% रह जाएगी और महंगाई बनी रहेगी.
गंभीर परिदृश्य: अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो दुनिया की विकास दर घटकर 2.5% तक गिर सकती है.
अत्यंत चिंताजनक परिदृश्य: यदि तेल की कीमतें इस वर्ष 110 डॉलर और अगले वर्ष 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो वैश्विक विकास दर सिमटकर महज 2% रह जाएगी, जो सीधे तौर पर वैश्विक मंदी का संकेत है. इस दौरान महंगाई 6% के करीब पहुंच सकती है.
बिना सोचे-समझे खर्च न करें सरकारें
IMF के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरिंचस (Pierre-Olivier Gourinchas) ने कहा कि यदि यह संघर्ष जारी रहता है, तो दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक और बड़ा झटका झेलना पड़ेगा.
इसके साथ ही IMF ने दुनिया भर की सरकारों को चेतावनी दी है कि वे बड़े और बिना योजना वाले सरकारी खर्चों से बचें. संस्था ने कहा है कि पहले से ही ऊंची महंगाई और भारी-भरकम कर्ज के बोझ को देखते हुए, किसी भी तरह की आर्थिक सहायता सीमित और लक्षित (targeted) होनी चाहिए.
-भारत एक्सप्रेस
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