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नासा का आर्टेमिस-2 मिशन सफल, चांद का चक्कर लगाकर धरती पर लौटे चार जांबाज अंतरिक्ष यात्री; रचा इतिहास

50 साल बाद मानवता फिर चांद के करीब पहुंची! नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने 6.9 लाख मील का सफर तय कर प्रशांत महासागर में सफल लैंडिंग की. यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानी बस्ती बसाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है.

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NASA Artemis 2 Mission: अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. उसका महत्वाकांक्षी मिशन Artemis II सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है. इस मिशन में शामिल चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित धरती पर लौट आए हैं. शनिवार सुबह अंतरिक्ष यान ने San Diego Coast के पास समुद्र में सफल लैंडिंग की.

नासा के मुताबिक, इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने करीब 6 लाख 90 हजार मील से ज्यादा का लंबा सफर तय किया. 10 दिन तक चले इस ऐतिहासिक अभियान ने एक नए युग की शुरुआत कर दी है. अब नासा की नजर अगले मिशन Artemis III पर है, जिसमें इंसानों को सीधे चांद की सतह पर उतारने की योजना है.

अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी पर नासा ने लैंडिंग का वीडियो भी साझा किया. एजेंसी ने खुशी जाहिर करते हुए अपने संदेश में सभी अंतरिक्ष यात्रियों का स्वागत किया और इस मिशन को ऐतिहासिक बताया.

चुनौतियों पर पाई फतह

हालांकि, इस मिशन की राह आसान नहीं थी. शुरुआत में इसे फरवरी में लॉन्च किया जाना था, लेकिन हाइड्रोजन ईंधन में रिसाव की वजह से इसे टालना पड़ा. इसके बाद तकनीकी दिक्कतों को ठीक करने में भी समय लगा. हीलियम प्रेशर लाइन में आई समस्या के कारण रॉकेट को फिर से मरम्मत के लिए भेजना पड़ा. लेकिन तमाम चुनौतियों के बावजूद आखिरकार मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया.

इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि यह पुराने Apollo Program से अलग और ज्यादा विविधता वाला था. जहां अपोलो मिशनों में सिर्फ पुरुष अंतरिक्ष यात्री शामिल थे, वहीं इस बार दल में एक महिला, एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और एक अंतरराष्ट्रीय सदस्य भी शामिल था.

कौन-कौन हैं मिशन के जांबाज?

मिशन की कमान कमांडर Reid Wiseman के हाथों में थी. उनके साथ पायलट Victor Glover, मिशन विशेषज्ञ Christina Koch और कनाडा के Jeremy Hansen शामिल थे. लॉन्च के वक्त कमांडर वाइजमैन के शब्द “चलो चांद पर चलते हैं” ने पूरी दुनिया का उत्साह बढ़ा दिया.

यह मिशन Kennedy Space Center से लॉन्च किया गया, जो ऐतिहासिक रूप से अपोलो मिशनों का भी गवाह रहा है. इस मौके को देखने के लिए हजारों लोग वहां मौजूद थे. सड़कों और समुद्र तटों पर भी भारी भीड़ देखने को मिली, जिसने 1960-70 के दशक के गौरवशाली अंतरिक्ष अभियानों की यादें ताजा कर दीं.

पृथ्वी की कक्षा से चंद्रमा के पार तक

अगर मिशन की बात करें, तो पहले 25 घंटे अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में ही रहे और उन्होंने अपने कैप्सूल की पूरी जांच की. इसके बाद मुख्य इंजन को चालू किया गया, जिसने उन्हें चंद्रमा की दिशा में आगे बढ़ाया. हालांकि वे चंद्रमा पर नहीं उतरे, बल्कि उसके पास से गुजरते हुए आगे बढ़े और करीब 6,400 किलोमीटर आगे जाकर यू-टर्न लेकर पृथ्वी की ओर लौट आए.

इस दौरान उन्होंने प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग की. इस मिशन के साथ ही ये अंतरिक्ष यात्री अब तक सबसे दूर तक जाने वाले इंसान बन गए हैं.

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अब क्या है भविष्य की तैयारी?

एक और खास बात यह रही कि इस बार अंतरिक्ष यान में आधुनिक जीवन-रक्षक सुविधाएं भी शामिल थीं. Artemis I के दौरान जहां कोई इंसान सवार नहीं था, वहीं इस बार पानी की व्यवस्था और टॉयलेट जैसी सुविधाएं पहली बार अंतरिक्ष में इस्तेमाल की गईं. यही कारण था कि नासा ने मिशन की शुरुआत में अतिरिक्त सावधानी बरती और सभी सिस्टम की जांच के बाद ही अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की ओर भेजा.

कुल मिलाकर, यह मिशन न सिर्फ तकनीकी रूप से सफल रहा, बल्कि इसने भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए मजबूत नींव भी तैयार कर दी है. अब पूरी दुनिया की नजर आर्टेमिस-3 पर है, जो इंसानों को एक बार फिर चांद की सतह पर उतारकर इतिहास रच सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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