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पाकिस्तान में खाद के लिए हाहाकार; मिडिल ईस्ट युद्ध की वजह से डीएपी (DAP) खाद आपूर्ति में आई भारी कमी

Pakistan Fertilizer Crisis: खाड़ी देशों में जारी संघर्ष ने न केवल पाकिस्तान के सप्लाई चेन को तोड़ा है, बल्कि ‘शिपिंग कॉस्ट’ को भी इतना बढ़ा दिया है कि अब खाद का आयात करना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है.

Pakistan Fertilizer Crisis

Pakistan Fertilizer Crisis: खाड़ी संघर्ष जारी रहने के साथ ही वैश्विक उर्वरक बाजारों में रुकावट ने फिर से पाकिस्तान की कृषि इनपुट सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर किया है.

‘डॉन’ अखबार के एक लेख के अनुसार, घरेलू उत्पादन क्षमता ने पाकिस्तान को यूरिया संकट के सबसे बुरे प्रभावों से बचा लिया है, लेकिन डायअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के मामले में ऐसा नहीं कहा जा सकता. आयात पर निर्भरता कृषि अर्थव्यवस्था को कमजोर बनाती है.

खाने-पीने की चीजों की बढ़ेंगी कीमतें

यूरिया के मामले में स्थानीय उत्पादन ने किसानों को खाद का इस्तेमाल कम करने से बचाया है, जिसका मतलब होता कम पैदावार और खाने-पीने की चीजों की ज्यादा कीमतें. डीएपी की स्थिति अलग है. पाकिस्तान केवल 0.7 मिलियन टन डीएपी का वार्षिक उत्पादन करता है, जबकि जरूरत 2 मिलियन टन से अधिक है. इस अंतर को पूरा करने के ल‍िए मध्य पूर्व से आयात करना पड़ता है. सामान्य परिस्थितियों में यह निर्भरता संभालने लायक होती है, हालांकि महंगी पड़ती है. वर्तमान संकट में, यह एक गंभीर कमजोरी है.

आपूर्ति में आ रही रुकावट

यूरिया के विपरीत, जहां घरेलू स्टॉक और उत्पादन निरंतरता एक सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं, डीएपी के आयात सीधे मूल्य अस्थिरता और लॉजिस्टिक बाधाओं के प्रति संवेदनशील हैं. आपूर्ति में रुकावट, शिपिंग प्रतिबंध और कच्चे माल की कमी पहले ही वैश्विक उपलब्धता को सीमित कर रही है. लंबी अवधि की रुकावट से लागत में तेज वृद्धि हो सकती है. बोआई के समय उपलब्धता सीमित हो सकती है और किसानों को या तो आवेदन कम करना पड़ेगा या उपयुक्त पोषक तत्व मिश्रण बदलना होगा.

कृषि पर पड़ेंगे गंभीर प्रभाव

र‍िपोर्ट के अनुसार, कृषि पर इसके प्रभाव गंभीर हैं. डीएपी शुरुआती चरण के फसल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेष रूप से मुख्य फसलों के लिए. इसका अपर्याप्त उपयोग यूरिया या अन्य पोषक तत्वों से आसानी से पूरा नहीं किया जा सकता, बिना उत्पादन क्षमता को प्रभावित किए. इस दृष्टि से डीएपी की कमी केवल आपूर्ति की समस्या नहीं है, यह उत्पादन, किसानों की आय, मूल्य स्थिरता और खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा है.

कम से कम, मौजूदा डीएपी प्लांट को लगातार गैस आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी. इसके अलावा, नीति निर्माताओं को व्यापक प्रोत्साहन संरचना पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि उत्पादन क्षमता में विस्तार को बढ़ावा दिया जा सके और धीरे-धीरे आयात निर्भरता को कम किया जा सके.

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र‍िपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी रहेंगी, देश की मजबूती और संवेदनशीलता के बीच का अंतर इस बात से निर्धारित होगा कि देश अपने यहां क्या उत्पादन कर सकता है और क्या नहीं.

(IANS के इनपुट पर आधारित)



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