Pakistan Taliban Conflict: पाकिस्तान और तालिबान दशकों से करीबी दोस्त रहे हैं. साल 1990 के दशक में अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ अभियान चलाने के लिए तालिबान के उदय में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई थी. इसे कई मौकों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मान चुके हैं. तालिबान के निर्माण में पाकिस्तान की भूमिका का कारण उसकी भारत के साथ प्रतिद्वंद्विता थी. इसके पीछे उसकी सोच भारत के खिलाफ रणनीतिक गहराई पाने की थी, तो फिर गड़बड़ कहां हो गई?
इस्लामाबाद और काबूल के बीच गुरुवार-शुक्रवार की रात से भीषण संघर्ष हो रहा है. दोनों देशों के अधिकारियों ने कहा है कि, पाकिस्तान रात भर अफगानिस्तान के प्रमुख शहरों यहां तक की राजधानी काबूल में भी भीषण हवाई हमले किये हैं. जिसके जवाब में अफगानिस्तान ने भी सीमा पर मौजूद पाक चौकियों को निशाना बनाया. अफगानिस्तान का दावा है कि उसने कुल 55 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है.
पाकिस्तान के अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने ये हमले हवाई और जमीनी दोनों किये हैं. जिसका निशाना तालिबान के गोला-बारूद डीपो, सैन्य ठिकानों, मुख्यालय रहे. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इसे ओपन वॉर (खुला युद्ध) बताया है.
पहले भी हो चुकी है झड़प
इससे पहले अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच सीमा पर जबरदस्त झड़प हुई थी. जिसमें दोनों तरफ से दर्जनों सैनिक मारे गए. दोनों इस्लामी देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए तुर्की, कतर और सऊदी अरब ने मध्यस्थता की, और युद्धविराम लागू कराया. हालांकि यह युद्धविराम ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया.
आखिर प्रश्न ये उठ रहा है कि दोनों इस्लामी देशों के बीच संघर्ष क्यों हो रहा है. जबकि दोनों लंबे समय से साथ रहे थे.
गुलामी की बेड़ियां तोड़ दी- इमरान खान
इसका जवाब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) है. साल 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता में दोबारा वापसी की तब पाकिस्तान ने उसका समर्थन किया था. पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने तब कहा था, “अफगानों ने गुलामी की बेड़ियां तोड़ दी है.”
लेकिन पाकिस्तान को जल्द ही पता चल गया कि उसने जैसा सोचा था वैसा तालिबान यह नहीं है. इस्लामाबाद का कहना है कि काबुल की सत्ता पर बैठा तालिबान उसके यहां खून बहाने वाले आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को अपने यहां पनाह देता है. टीटीपी के लड़ाके पाकिस्तान में हमले कर अफगानिस्तान में शरण लेते हैं.
पाकिस्तान का ये भी आरोप है कि बलूचिस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे बलूच लिबरेशन आर्मी के लड़ाके भी अफगान क्षेत्र को सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.
साल 2022 के बाद पाक में बढ़े आतंकी हमले
वैश्विक निगरानी संगठन आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 के बाद से पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. पाकिस्तान में लगातार बलूच लिबरेशन आर्मी और टीटीपी के हमले बढ़ रहे हैं.
हालांकि काबुल ने हर बार इन आरोपों से इनकार किया है. इसके इतर तालिबान ने पाकिस्तान पर उसके दुश्मन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के लड़ाकों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है. जिसे पाकिस्तान ने हर बार इनकार किया है.
पाकिस्तान ने क्यों किया हमला?
कुछ हफ्ते पहले पाकिस्तान में TTP के द्वारा पाकिस्तान के कई इलाकों में हमले किये. जिसमें पाक सैनिक से लेकर पुलिस तक को निशाना बनाया गया. पाकिस्तान का आरोप है कि इसके पीछे अफगानिस्तान में छिपे टीटीपी का हाथ है. इसको साबित करने के लिए उसके पास बड़ा और पुख्ता सबूत है.
पाकिस्तान में हुए इन हमलों में 11 सुरक्षाकर्मी और 2 नागरिकों की मौत हो गई थी. इन हमलों की जिम्मेदारी टीटीपी ने ली थी, जिसे एक अफगान नागरिक ने अंजाम दिया था.
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कौन है पाकिस्तानी तालिबान?
पाकिस्तानी तालिबान का पूरा नाम तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान है. इसकी स्थापना साल 2007 में उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में कई आतंकी संगठनों ने मिलकर किया था. उस समय टीटीपी ने अफगान तालिबान के साथ मिलकर अमेरिकी सेना के खिलाफ जंगें भी लड़ी थी और अफगान तालिबान के लड़ाकों को पाकिस्तान में सुरक्षित पनाह दी थी.
बाद के सालों में पाकिस्तान सरकार के साथ हुए मतभेद के बाद टीटीपी पाकिस्तान के लिए खतरा बन गया. उसने बाजारों, सैन्य ठिकानों, मस्जिदों से लेकर पुलिस स्टेशनों पर जमकर हमले किये. इनमें स्वात घाटी की वो घटना भी शामिल थी. जब टीटीपी के लड़ाकों ने साल 2012 में स्कूल जा रही मलाला यूसुफजई पर हमले किये थे.
पाकिस्तान ने चलाए टीटीपी के खिलाफ अभियान
देश में बढ़ते टीटीपी के हमलों को देखते हुए साल 2012 के बाद पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तानी तालिबान के खिलाफ जमकर अभियान चलाए. जो साल 2016 में जाकर खत्म हुआ. इन अभियानों में टीटीपी को भारी नुकसान हुआ और अगले कुछ सालों तक पाकिस्तान तालिबान के हमलों में काफी कमी आ गई थी.
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अब आगे क्या?
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग अभी और तेज हो सकती है. वहीं काबुल भी इसके जवाब में सीमा पर मौजूद पाक चौकियों को निशाना बना सकता है या पाक सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ सकता है.
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज के 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सामने तालिबान कहीं नहीं टिकता. पाकिस्तान के पास जहां 6 लाख से ज्यादा सक्रिय सैनिक, 6000 से ज्यादा बख्तरबंद लड़ाकू वाहन और 400 से ज्यादा फाइटर जेट्स हैं. तो वहीं अफगानिस्तान तालिबान के पास मात्र 1 लाख 72 हजार सैनिक, 6 विमान और 23 हेलीकॉप्टर हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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