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जानें क्यों दिया जाता है ‘आर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’? पीएम मोदी को रूस में इससे नवाजा गया

सेंट एंड्रयू को जीसस का पहला दूत और रूस का संरक्षक संत माना जाता है. उन्हीं के सम्मान में साल 1698 में इस अवॉर्ड की शुरुआत सार पीटर द ग्रेट ने की थी

Order of St. Andrew the Apostle to PM Modi

फोटो-सोशल मीडिया

Order of St. Andrew the Apostle to PM Modi: हाल ही में पीएम मोदी दो दिवसीय रूस यात्रा पर गए थे. इस दौरान उनको रूस के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से नवाजा गया था. खुद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने पीएम मोदी को इससे नवाजा था. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है तो वहीं इसकी चर्चा जोरों पर है. इस सम्मान तो पीएम मोदी ने भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान बताया है.

जानें कब हुई थी इस सम्मान की शुरुआत

बता दें कि सेंट एंड्रयू को जीसस का पहला दूत और रूस का संरक्षक संत माना जाता है. उन्हीं के सम्मान में साल 1698 में इस अवॉर्ड की शुरुआत सार पीटर द ग्रेट ने की थी. इसका नाम सेंट एंड्रयू से आया है, जिन्हें यीशु के प्रेरितों या 12 मूल अनुयायियों में से एक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि मसीह के सूली पर चढ़ने के बाद, प्रेरितों ने उनके संदेश को फैलाने के लिए लंबी दूरी की यात्रा की थी.

सेंट एंड्रयू ने रूस, ग्रीस और यूरोप और एशिया के अन्य स्थानों की यात्रा की और कॉन्स्टेंटिनोपल के चर्च की स्थापना की, जिसने बाद में रूसी रूढ़िवादी चर्च की स्थापना की. बता दें कि सेंट एंड्रयू को रूस और स्कॉटलैंड का संरक्षक संत माना जाता है. स्कॉटलैंड के झंडे पर ‘X’ चिन्ह संत के प्रतीक से लिया गया है, जिसे ‘साल्टायर’ कहा जाता है. कहा जाता है कि उन्हें इसी आकार के क्रॉस पर सूली पर चढ़ाया गया था. बता दें कि रूस में लगभग 140 मिलियन की आबादी में से 90 मिलियन से अधिक लोग चर्च का अनुसरण करते हैं.

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17 वैकल्पिक लिंक हैं इस आदेश में

मिली जानकारी के मुताबिक ज़ार पीटर द ग्रेट (1672-1725) ने 1698 में सेंट एंड्रयू के आदेश की स्थापना की. आदेश की श्रृंखला में 17 वैकल्पिक लिंक हैं, और इसमें रूसी संघ के राज्य प्रतीक, एक दो-सिर वाले ईगल की एक सोने की परत वाली छवि है. इसमें एक बिल्ला, एक सितारा और एक हल्के नीले रंग का रेशमी मौइरे रिबन को भी शामिल किया गया है. युद्ध में विशिष्टता के लिए पहचाने जाने वाले लोगों के लिए, बिल्ला और स्टार को तलवारों से सजाया जाता है. 1918 में रूसी क्रांति के बाद इस आदेश को समाप्त कर दिया गया था, जिसने ज़ारिस्ट शासन को उखाड़ फेंका था. इसके बाद 1998 में रूस के राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश द्वारा इसे फिर से स्थापित किया गया.

इनका भी किया जा चुका है सम्मान

बता दें कि 2017 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और कजाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेव सहित कई विदेशी नेताओं को इस सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है. इसी के साथ ही रूस के प्रभावशाली व्यक्तियों को भी इससे सम्मानित किया जा चुका है.लेखक सर्गेई मिखाल्कोव, सैन्य इंजीनियर और बंदूक डिजाइनर मिखाइल कलाश्निकोव, रूसी रूढ़िवादी चर्च के नेता पैट्रिआर्क एलेक्सी द्वितीय और रूसी रूढ़िवादी चर्च के वर्तमान प्रमुख पैट्रिआर्क क्रिल,सोवियत संघ के अंतिम नेता मिखाइल गोर्बाचेव को भी इससे सम्मानित किया जा चुका है.

जानें कौन प्राप्त करता है ये सम्मान?

बता दें कि यह सम्मान रूसी संघ के लिए उत्कृष्ट सेवाओं के लिए विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को भी प्रदान किया जा सकता है. तो वहीं यह सम्मान रूस के लिए असाधारण सेवाओं के लिए प्रमुख सरकारी और सार्वजनिक हस्तियों, सैन्य नेताओं और विज्ञान, संस्कृति, कला और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के उत्कृष्ट प्रतिनिधियों को दिया जाता है. ये सम्मान सबसे उत्कृष्ट नागरिक या सैन्य योग्यता के लिए दिया जाता है. प्रधानमंत्री के लिए इस सम्मान की घोषणा 2019 में “रूस और भारत के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने और रूसी और भारतीय लोगों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने में असाधारण सेवाओं” के लिए की गई थी.

-भारत एक्सप्रेस



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