PoK Protest Firing
PoK Protest Firing: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pok) में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मासूम कश्मीरी जनता पर पाकिस्तानी सेना ने जमकर गोलीबारी कर दी. इस दौरान कुल 26 लोग मारे गए, जिसमें 7 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं. पाकिस्तानी सेना की इस बेरहम कार्रवाई ने पीओके में आम लोगों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रदर्शन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की तरफ से किया जा रहा था. जिसे पाकिस्तानी सेना ने बड़ी बेरहमी से कुचल दिया. रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रदर्शन पीओके में बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघन, महंगाई, बेरोजगारी सहित आर्थिक बदहाली को लेकर बुलाया गया था. प्रदर्शन में शामिल लोग हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से अपने अधिकार और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे थे.
निहत्थे लोगों पर की अंधाधुंध फायरिंग
जिसपर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की अंधाधुंध फायरिंग ने पूरे पीओके को हिंसा में झोंक दिया. पाक सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में आम लोग मारे गए. जिसमें 19 बच्चे और 7 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं. हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है.
Mass protests and a shutdown spread across PoK, with demonstrations reported in Rawalakot, Muzaffarabad, Kotli and beyond. Security forces used tear gas and live fire, leaving several injured. Protesters are demanding economic relief and political reforms. pic.twitter.com/IrlwFCd8KE
— Rajeev Ranjan (@Rajeevranjantv) June 9, 2026
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस प्रदर्शन को कुचलने के लिए पाकिस्तान ने 14000 अतिरिक्त सुरक्षाबलों को पीओके में भेजा था. सुरक्षाबलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी. हालात ये थे कि मृतकों के शोक सभा में शामिल लोगों पर भी ओपन फायर किया गया.
पाक फौज ने की थी पूरी प्लानिंग
पीओके में हो रहे इस बड़े स्तर के प्रदर्शन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी फौज ने पहले से ही प्लानिंग की थी. कार्रवाई की तस्वीरें, वीडियो समेत अन्य सबूत पाकिस्तान से बाहर ना जा पायें इसको लेकर कम्युनिकेशन ब्लैकआउट भी कर दिया गया था. इसके अलावा इंटरनेट सहित कई संचार साधनों को भी बंद कर दिया गया था.
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इसी बीच भारत सरकार ने भी पीओके की स्थिति को लेकर पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा किया है. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाएं फैलाने का आरोप लगाया है.
-भारत एक्सप्रेस
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