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चीन का इंजन, अमेरिकी चिप… रूस की नई मिसाइल के आगे नाकाम हुई यूक्रेन की एयर डिफेंस

Russia Ukraine war: रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस की नई S8000 बांडेरोल मिसाइल ने यूक्रेन की सुरक्षा प्रणाली को बड़ी चुनौती दी है.

Russia Ukraine war: रूस-यूक्रेन युद्ध में हथियारों का स्तर लगातार बदल रहा है. इसी क्रम में रूस ने हाल ही में S8000 बांडेरोल क्रूज मिसाइल तैनात की है. यह मिसाइल पारंपरिक क्रूज मिसाइल और सुसाइड ड्रोन का मिश्रण है, जिसे कीव पर हुए बड़े हमलों में देखा गया. इसकी वजह से यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है.

मशीन गन से बाहर इसकी रफ्तार

यूक्रेनी सेना अक्सर मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने के लिए मशीन गन वाली मोबाइल टीमों का इस्तेमाल करती है. लेकिन बांडेरोल की रफ्तार इतनी तेज है कि ये टीमें बेकार साबित हो रही हैं. इसकी क्रूज स्पीड 520 से 560 किमी/घंटा है और यह 650 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है. इसे रोकने के लिए ‘गेपार्ड’ जैसी ऑटोमैटिक एंटी-एयरक्राफ्ट प्रणालियों की जरूरत पड़ती है.

छोटा आकार और चालाकी

पारंपरिक रूसी मिसाइलों की तुलना में बांडेरोल का आकार छोटा है. करीब 5 मीटर लंबाई और 2.2 मीटर विंगस्पैन के कारण यह रडार से आसानी से बच निकलती है. यूक्रेनी खुफिया रिपोर्ट बताती है कि यह बेहद कम जगह में तेजी से दिशा बदल सकती है. यही वजह है कि इसके फ्लाइट पाथ का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है और यह हवाई सुरक्षा को चकमा दे देती है.

जैमिंग-रोधी तकनीक

इस मिसाइल में रूस ने कोमेटा डिजिटल सैटेलाइट नेविगेशन एंटीना लगाया है. यह तकनीक यूक्रेन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम को बेअसर कर देती है. जब सेना इसके GPS को ब्लॉक करने की कोशिश करती है, तो यह एंटीना मिसाइल को सुरक्षित रूप से लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करता है.

विदेशी पार्ट्स से बनी मिसाइल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद इसमें 30 विदेशी कंपनियों के पार्ट्स लगे हैं. इसका इंजन चीन का Swiwin SW800Pro है, जो आमतौर पर रिमोट-कंट्रोल विमानों में इस्तेमाल होता है और ई-कॉमर्स साइट्स पर आसानी से उपलब्ध है. इसके अलावा इसमें जापान की बैटरियां, दक्षिण कोरिया के मोटर्स और अमेरिका-स्विट्जरलैंड के माइक्रोकंट्रोलर्स भी शामिल हैं.

सप्लाई चेन का जाल

रूस ने आर्मेनिया, कजाकिस्तान, चीन, तुर्की और यूएई जैसे देशों के जरिए शेल कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया है. इसी रास्ते से ये पार्ट्स रूस तक पहुंचते हैं. इस तरह रूस ने प्रतिबंधों को दरकिनार कर मिसाइल निर्माण जारी रखा है.

बड़े हमलों में रणनीति

रूस इस मिसाइल को अकेले इस्तेमाल नहीं करता. इसे शहीद ड्रोनों और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ मिलाकर दागा जाता है. जब सैकड़ों हथियार एक साथ यूक्रेन के हवाई क्षेत्र में घुसते हैं, तो एयर डिफेंस सिस्टम व्यस्त हो जाता है. ऐसे समय में बांडेरोल अपनी रफ्तार और चालाकी से सुरक्षा को तोड़कर भारी तबाही मचाती है.

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बांडेरोल मिसाइल ने यूक्रेन की सुरक्षा प्रणाली के लिए नई मुश्किलें पैदा कर दी हैं. इसकी तेज रफ्तार, छोटा आकार, जैमिंग-रोधी तकनीक और विदेशी पार्ट्स से बनी संरचना इसे बेहद घातक बना देती है. रूस इसे रणनीतिक तरीके से इस्तेमाल कर रहा है, जिससे यूक्रेन की रक्षा प्रणाली पर दबाव और बढ़ गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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