अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ पर फैसला
Trump Tariffs: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के मामलों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाने वाला है. यह फैसला भारतीय समयानुसार रात 8:30 बजे तक आ सकता है. ट्रंप ने इन टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लगाया था. अगर कोर्ट ट्रंप के खिलाफ फैसला देती है तो सरकार को अरबों डॉलर वापस करने पड़ सकते हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने जताई गहरी चिंता
ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया पर कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट उनके टैरिफ रद्द कर देती है तो अमेरिका के लिए बहुत बड़ी मुसीबत आ जाएगी. उन्होंने लिखा कि देश “बर्बाद” हो जाएगा और “WE’RE SCREWED” जैसी स्थिति बन जाएगी.
ट्रंप का दावा है कि टैरिफ से अमेरिका को सैकड़ों अरब डॉलर रेवेन्यू मिला है. अगर यह पैसा वापस करना पड़ा तो अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ सरकार का पैसा जाएगा बल्कि कंपनियों और देशों द्वारा किए गए निवेश भी प्रभावित होंगे. कुल मिलाकर यह रकम ट्रिलियंस डॉलर तक पहुंच सकती है.

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टैरिफ कब और क्यों लगाए गए?
अप्रैल 2025 में ट्रंप ने दुनिया के ज्यादातर देशों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगा दिए. इनमें 10 फीसदी बेसलाइन टैरिफ और कई देशों पर ज्यादा रेट थे. ट्रंप ने इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा. उनका कहना था कि व्यापार घाटा और विदेशी निर्भरता अमेरिका के लिए बड़ा खतरा है. इससे घरेलू कंपनियों को फायदा मिलता है और विदेशी सामान महंगा हो जाता है.
टैरिफ का कानूनी आधार क्या है?
ट्रंप ने इन टैरिफ के लिए 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल किया. यह कानून राष्ट्रपति को आपात स्थिति में विदेशी लेन-देन पर नियंत्रण की शक्ति देता है. जैसे युद्ध या बड़ा आर्थिक संकट हो तो राष्ट्रपति तुरंत फैसले ले सकता है. ट्रंप ने व्यापार घाटे को आपातकाल बताकर इस कानून का सहारा लिया. लेकिन कानून में “टैरिफ” शब्द का जिक्र नहीं है.
कोर्ट में चुनौती और पुरानी सुनवाई
टैरिफ के खिलाफ 12 अमेरिकी राज्य और छोटे कारोबारियों ने मुकदमा किया. इन राज्यों में एरिजोना, न्यूयॉर्क, इलिनॉय जैसे नाम शामिल हैं. उनका कहना है कि राष्ट्रपति ने अपनी सीमा लांघी है. टैरिफ लगाना कांग्रेस का अधिकार है. निचली अदालतों ने ट्रंप के खिलाफ फैसला दिया था. नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट में लंबी सुनवाई हुई. जजों ने सवाल उठाए कि क्या IEEPA से इतने बड़े और लंबे टैरिफ लगाने का अधिकार है. कई जजों ने ट्रंप सरकार की दलील पर संदेह जताया.
कोर्ट के फैसले के संभावित असर
अगर कोर्ट ट्रंप के पक्ष में फैसला देती है तो राष्ट्रपति को भविष्य में आपातकाल के नाम पर बड़े व्यापारिक फैसले लेने की छूट मिल जाएगी. बिना कांग्रेस की मंजूरी के वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है. लेकिन अगर कोर्ट टैरिफ रद्द करती है तो राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां सीमित हो जाएंगी. सरकार को पहले से वसूले गए टैरिफ (लगभग 130-150 अरब डॉलर) वापस करने पड़ सकते हैं. इससे आयात बढ़ सकता है और अर्थव्यवस्था में बदलाव आ सकता है.
यह मामला सिर्फ टैरिफ का नहीं
यह फैसला अमेरिका में राष्ट्रपति की शक्ति की सीमा तय करेगा. क्या आपातकाल के नाम पर कोई भी बड़ा आर्थिक फैसला लिया जा सकता है? दुनिया के साथ अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों पर भी गहरा असर पड़ेगा. सभी की निगाहें आज सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं. फैसला आने के बाद ही साफ होगा कि ट्रंप की व्यापार नीति कितनी मजबूत रहेगी.
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