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डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी अदालत से करारा झटका, कोर्ट ने ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ पर लगाई रोक

अदालत ने कहा, “कांग्रेस ने आईईईपीए के तहत राष्ट्रपति को असीमित शक्तियां नहीं सौंपी हैं. संविधान कांग्रेस को विदेशी राष्ट्रों के साथ व्यापार को विनियमित करने की विशेष शक्ति देता है.

Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump) को बड़ा झटका देते हुए एक संघीय व्यापार अदालत ने उनके प्रस्तावित ‘लिबरेशन डे’ आयात शुल्क के क्रियान्वयन को खारिज कर दिया. अदालत के अनुसार ट्रंप ने अपने संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया है.

ट्रंप पर अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

मैनहट्टन में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में तीन न्यायाधीशों के पैनल ने बुधवार (अमेरिकी समयानुसार) को निर्धारित किया कि अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष चलाने वाले देशों पर ट्रंप के कर्तव्यों ने अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत राष्ट्रपति पद को दी गई शक्तियों के दायरे का उल्लंघन किया है.

ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ के बचाव की मांग की

ट्रंप प्रशासन ने आईईईपीए का संदर्भ देते हुए टैरिफ का बचाव करने की मांग की. अधिकारियों ने दावा किया कि व्यापार असंतुलन से उत्पन्न राष्ट्रीय खतरे का सामना करने के लिए (विशेष रूप से चीन और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ) ट्रंप की कार्रवाई आवश्यक थी.

उन्होंने अदालत को चेतावनी दी कि टैरिफ को रोकना चीन के साथ चल रहे व्यापार शांतिदूत वार्ताओं को खतरे में डाल सकता है और संभावित रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को फिर से भड़का सकता है. अदालत की फाइलिंग में ट्रंप की कानूनी टीम ने तर्क दिया है कि राष्ट्रपति ने साउथ एशिया में हालात को कम करने के लिए अपने आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का रणनीतिक रूप से उपयोग किया है.

ट्रंप प्रशासन ने कोर्ट में दी ये दलीलें

उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप (Trump) की टैक्स धमकियों ने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध-विराम समझौते में मदद की, जो 22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकवादी हमले के बाद हुआ, जिसमें पाकिस्तान आधारित आतंकवादी शामिल थे. हालांकि, भारत का कहना है कि ट्रंप प्रशासन का इन दोनों देशों के बीच संघर्ष में कोई हस्तक्षेप नहीं था और पाकिस्तान ने भारत से सैन्य कार्रवाई रोकने का आग्रह किया. अधिकारियों ने अदालत को बताया कि व्यापार वार्ताएं एक नाजुक चरण में हैं. कई देशों के साथ लंबित समझौतों को अंतिम रूप देने की समय सीमा 7 जुलाई है.

अदालत ने कहा, “कांग्रेस ने आईईईपीए के तहत राष्ट्रपति को असीमित शक्तियां नहीं सौंपी हैं. संविधान कांग्रेस को विदेशी राष्ट्रों के साथ व्यापार को विनियमित करने की विशेष शक्ति देता है. यह अधिकार केवल इस कारण से समाप्त नहीं होता है कि राष्ट्रपति आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करता है.”

अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका फैसला टैरिफ के उपयोग की बुद्धिमत्ता या प्रभावशीलता का मूल्यांकन नहीं करता, बल्कि पूरी तरह से कानून पर केंद्रित है. यह निर्णय दो मुकदमों के जवाब में आया. इनमें से एक लिबर्टी जस्टिस सेंटर द्वारा उन पांच छोटे अमेरिकी व्यवसायों के पक्ष में दायर किया गया जो लक्षित देशों से आयात पर निर्भर हैं और दूसरा 13 अमेरिकी राज्यों द्वारा. तर्क दिया गया कि टैरिफ बिना उचित विधायी प्रक्रिया के उनके बिजनेस ऑपरेशन को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाएगा और लागत बढ़ाएगा. देश भर में शुल्क उपायों के खिलाफ कम से कम पांच अतिरिक्त कानूनी चुनौतियां लंबित हैं.

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निर्णय के बावजूद ट्रंप (Trump) प्रशासन ने एक तत्काल अपील नोटिस दर्ज की, जिससे पूर्व राष्ट्रपति की कानूनी लड़ाई जारी रखने का संकेत मिला. ट्रंप ने 2 अप्रैल को अमेरिका के सबसे ज्यादा व्यापारिक साझेदारों पर 10 प्रतिशत बेसलाइन के साथ व्यापक टैरिफ लगाए, और उन देशों के लिए उच्च दरें लगाईं जिनके साथ अमेरिका का सबसे ज्यादा व्यापार घाटा है, चीन और यूरोपीय संघ के सदस्यों जैसे देशों पर उच्च दरें लगाई गईं.

हालांकि, इस घोषणा ने वित्तीय बाजारों में हलचल पैदा कर दी, जिसके कारण एक हफ्ते के अंदर कई देश-विशिष्ट शुल्कों पर अस्थायी रोक लगानी पड़ी. व्यापार संबंधों को स्थिर करने के लिए एक और कदम के रूप में ट्रंप प्रशासन ने 12 मई को कहा कि वह व्यापक व्यापार सौदे का अनुसरण करते हुए चीन पर सबसे अधिक टैरिफ को अस्थायी रूप से कम करेगा. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कुछ शुल्कों को कम करने पर सहमति व्यक्त की है, जो कम से कम 90 दिनों के लिए लागू रहेगी.

-भारत एक्सप्रेस



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