अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरान पर किया सबसे बड़ा हमला
US Attack On Iran: अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर एक बड़ा सैन्य हमला किया है. पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका ईरान के खिलाफ चुपचाप छोटे-मोटे हमले कर रहा था, लेकिन केशम द्वीप पर हुई इस कार्रवाई को इस पूरे अभियान का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है. इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी लगातार अमेरिका पर ईरान के खिलाफ एक्शन लेने का दबाव बना रहे थे.
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने यह माना है कि पिछले कुछ हफ्तों के हमले बहुत छोटे स्तर पर और बेहद गुप्त रखे गए थे. ऐसा इसलिए किया गया ताकि दुनिया को यह भनक न लगे कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई बड़ा सैन्य अभियान दोबारा शुरू कर दिया है.
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी ‘IRNA’ के अनुसार, रणनीतिक रूप से बेहद अहम ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पास स्थित केशम द्वीप पर कई जोरदार धमाके सुने गए. हैरानी की बात यह है कि यह हमला ठीक ऐसे समय पर हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद ईरान के साथ किसी बड़े युद्ध के टलने और शांति समझौता होने की उम्मीद जता रहे थे.
समझौते के दावों के बीच हुआ हमला
ईरान पर यह एयरस्ट्राइक ऐसे वक्त में हुई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ही यह दावा किया था कि ईरान के साथ बड़ा युद्ध टल सकता है. उन्होंने कहा था कि इसी उम्मीद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर बताया था कि तेल के दाम करीब 10 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गए हैं, जो एक रिकॉर्ड गिरावट है. उन्होंने यह भी दावा किया था कि ईरान जल्द से जल्द अमेरिका के साथ कोई समझौता करना चाहता है.
जेडी वेंस ने भी जताई थी उम्मीद
इस हमले से महज कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी दोनों देशों के बीच किसी समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे. उन्होंने सोमवार को कहा था कि ईरान के साथ कई दौर की अच्छी बातचीत हुई है. वेंस ने पिछले हफ्ते ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भी भेजा था, जिसे लेकर उन्होंने बातचीत के पॉजीटिव रहने की बात कही थी. वेंस ने यह भी बताया था कि हमले से एक घंटे पहले ही उनकी इस मुद्दे पर राष्ट्रपति ट्रंप से चर्चा हुई थी. यानी एक तरफ जहां कूटनीतिक बातचीत और समझौते की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ केशम द्वीप पर हुए हमले ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर से चरम पर पहुंचा दिया है.
नेतन्याहू के दबाव में अटैक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार अमेरिका पर ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बना रहे थे. वह चाहते थे कि अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) खत्म होने के बाद ट्रंप ईरान पर बड़ा हमला करें. अमेरिका में चल रहे इन चुनावों के बीच ट्रंप ने यह जरूर संकेत दिए थे कि उनके पास ईरान पर दोबारा हमला करने का विकल्प खुला है, लेकिन चुनाव के चलते वे सीधी सैन्य कार्रवाई से बच रहे थे.
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अमेरिका और ईरान के बीच इस नए तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है. दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों में हलचल बढ़ा दी है. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसे संवेदनशील इलाके में तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं एक बार फिर गहराने लगी हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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