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US: ‘एक दशक पहले नहीं था, आज जैसा भरोसा और विश्वास’, भारत के साथ संबंधों पर अमेरिकी अधिकारी कर्ट कैंपबेल का बड़ा बयान

US: कर्ट कैंपबेल ने कहा कि भारत का संबंध वैश्विक मंच पर संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंध है.

Kurt-Campbell

कर्ट कैंपबेल

US: भारत अमेरिका संबंधों को लेकर अमेरिका ने एक बड़ा बयान दिया है. इसे लेकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए राष्ट्रपति जो बिडेन के शीर्ष अधिकारी, कर्ट कैंपबेल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच विश्वास की यह डिग्री एक दशक पहले मौजूद नहीं थी. कर्ट कैंपबेल ने कहा , “मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच जो अधिक से अधिक विकसित हुआ है, वह भरोसे और भरोसे का एक स्तर है , जो स्पष्ट रूप से एक दशक पहले मौजूद नहीं था.”

पीएम मोदी की अमेरिकी यात्रा को बताया खास

22 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह यात्रा अमेरिका को “कॉन्‌सिक्रेट्‌” करेगी. उन्होंने कहा कि भारत का संबंध वैश्विक मंच पर संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंध है.” उन्होंने आगे कहा कि भारत के साथ जुड़ने की उनकी अपने समय में, इस प्रक्रिया में विकसित हुई सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक विश्वास और विश्वास की डिग्री है जो एक दशक पहले मौजूद नहीं थी. यात्रा के संभावित परिणामों पर बात करते हुए, कर्ट ने कहा, “उन क्षेत्रों के बारे में चर्चा होगी जहां हम एकजुट हैं, और जिन क्षेत्रों में अभी भी हमारी चिंताएं हैं.”

दोनों देशों के सामने चुनौतियां 

कर्ट ने दोनों देशों की व्यक्तिगत चिंताओं पर चर्चा करते हुए कहा, “हम दोनों के सामने चुनौतियां हैं, और मुझे लगता है कि हमारा लक्ष्य उस पर निर्माण करना होगा. जहां तक ​​मेरा मानना ​​है कि यह निश्चित रूप से द्विदलीय सहमति प्रतीत होती है.” उन्होंने कहा कि विश्व मंच पर भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को दुनिया पहचान रही है और यह केवल रणनीतिक नहीं है. उन्होंने कहा, “कई कारोबारी समूह और निवेश समूह भारत को नई आपूर्ति श्रृंखलाओं, नए निवेश अवसरों और सबसे प्रभावशाली डायस्पोरा के साथ विश्व स्तर पर विविधता लाने की रणनीति के हिस्से के रूप में देख रहे हैं.”

शिक्षा को लेकर कही खास बात

कर्ट कैंपबेल ने कहा, “हमारे विश्वविद्यालयों को कई और इंजीनियरों और हाई-टेक लोगों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है.” उन्होंने आगे कहा कि भारतीय एनएस का सामान्य रवैया स्वेच्छा से काम करना है और जब वे किसी अवसर को देखते हैं तो उसका फायदा उठाते हैं, और इसलिए हम उन अवसरों को अधिक से अधिक लोगों के लिए खोलना चाहते हैं, मंडल भर के लोगों के लिए,”

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बता दें कि कर्ट कैंपबेल ने 6 जून को संयुक्त राज्य अमेरिका की विदेश नीति और दुनिया में अमेरिका की भूमिका पर हडसन इंस्टीट्यूट के विशिष्ट साथी वाल्टर रसेल मीड के साथ अपनी चर्चा में ये टिप्पणियां कीं.



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