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बांग्लादेश में बच्चों के चुनाव से क्यों खुश हुआ पाकिस्तान? जाने पीछे का ‘गंदा खेल’

Dhaka University Election: बांग्लादेश के ढाका विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी की जीत हुई है. इससे पाकिस्तान में खुशी है. आखिर क्या है इस खुशी का कारण?

Dhaka University Election Pakistan Happy For Bangladesh Jamaat E Islami

Dhaka University Election: जब कहीं कोई चोर चोरी करता है तो उसका साथी सबसे ज्यादा खुश होता है. ठीक इसी तरह की खुशी पाकिस्तान में देखने को मिली जब ढाका विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव (डीयूसीएसयू) के परिणाम बुधवार को घोषित किए गए. बांग्लादेश के ढाका विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनावों में कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी की जीत हुई को पाकिस्तान फूला नहीं समा रहा है. पाक ने इस जीत पर खुशी जताते हुए कहा कि बांग्लादेश में ‘नया इतिहास’ रचा गया है. यह वही पाकिस्तान है, जो हमेशा से बांग्लादेश को अस्थिर करने का खूनी खेल खेलता रहा है.

ढाका विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में कुल 28 पदों के लिए 471 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई, जिनमें इस्लामी छात्र शिबिर (आईसीएस) पैनल के अबू शादिक कायम, एस एम फरहाद और मोहिउद्दीन खान उपाध्यक्ष, महासचिव और सहायक महासचिव पद के लिए चुने गए. चुनावों में जीत के तुरंत बाद जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान ने भी डीयूसीएसयू चुनाव जीतने पर बधाई दी गई.

हिंदुओं के खिलाफ आई एकता

पिछले साल जुलाई-अगस्त में हुए विरोध प्रदर्शनों में हिंदुओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों और गैर-इस्लामी सांस्कृतिक संस्थानों के धार्मिक स्थलों पर भीड़ ने हमला कर कलाकृतियों को तहस नहस कर छात्र एकता को आकार दिया था. हिंसा का ये दौर अब भी जारी है और यही बात डीयूसीएसयू चुनाव में आईसीएस की सफलता में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है.

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साजिश रच रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को देखते हुए, विश्लेषकों का मानना ​​है कि ये नतीजे यह भी दर्शाते हैं कि बांग्लादेश की राजनीति, हिंसा समर्थक कट्टरपंथियों को तरजीह दे रही है. आईसीएस द्वारा डीयूसीएसयू चुनाव जीतने के साथ ही जमात-ए-इस्लामी का हेरफेर या साजिश के जरिए एकीकरण शुरू हो गया है.

इतिहास में पहली बार

डीयूसीएसयू के इतिहास में यह पहली बार है कि जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा ने खुले तौर पर पूरे पैनल के साथ चुनाव लड़ा, जिसका मुख्य कारण मुहम्मद यूनुस के अंतरिम प्रशासन के तहत हुए चुनाव और प्रमुख अवामी लीग की बांग्लादेश छात्र लीग पर प्रतिबंध है.

आईसीएस पिछले साल सितंबर में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के चौंकाने वाले इस्तीफे के एक महीने बाद सार्वजनिक रूप से फिर से सामने आया, और इसने ढाका विश्वविद्यालय में बांग्लादेश छात्र लीग के 15 साल लंबे वर्चस्व को भी समाप्त कर दिया. अपने पुनरुत्थान के एक साल बाद, इस कट्टरपंथी छात्र संगठन ने मदरसों (धार्मिक इस्लामी स्कूलों) के छात्रों का पर्याप्त समर्थन हासिल करने में कामयाबी हासिल की.

प्रतिद्वंदियों ने बताया तमाशा

इस बीच, अबिदुल और उमामा ने डीयूसीएसयू चुनाव परिणामों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि उनमें धांधली हुई थी और वो एक तमाशा था. उन्होंने आरोप लगाया कि ढाका विश्वविद्यालय प्रशासन ने देश को शर्मसार किया है क्योंकि पूरा प्रशासन, शिबिर के वफादार चला रहे हैं.

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पाकिस्तान क्यों कर रहा है ऐसा?

पाकिस्तान की खुशी यह साफ बताती है कि वह बांग्लादेश में हिंसा और कट्टरपंथ की वापसी का स्वागत कर रहा है. हाल के चुनावों में Gen-Z ने जिस तरह से बांग्लादेश की राजनीति को बदला, उससे पाकिस्तान को मिर्ची लग गई थी. अब जब कट्टरपंथियों की जीत हुई है, तो पाकिस्तान अपनी पुरानी चालों को फिर से सक्रिय करने की कोशिश करेगा. यह बांग्लादेश की सुरक्षा और भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है. पाकिस्तान की इस प्रतिक्रिया से यह साबित होता है कि वह अपने पड़ोसियों के विकास और शांति को कभी नहीं देख सकता.



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