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इंदौर में कांग्रेस के ‘‘डमी’’ उम्मीदवार ने चुनाव लड़ने के लिए मप्र हाईकोर्ट में दायर की अपील, 3 मई को हो सकती है सुनवाई 

मोती सिंह ने इस अपील में उच्च न्यायालय की एकल पीठ के 30 अप्रैल के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें कांग्रेस के चुनाव चिन्ह हाथ के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति की गुहार वाली उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी.

मोती सिंह पटेल- (कांग्रेस )

मोती सिंह पटेल- (कांग्रेस )

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

इंदौर में कांग्रेस के “डमी” (वैकल्पिक) उम्मीदवार मोती सिंह ने पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति के लिए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में बृहस्पतिवार को अपील दायर की.
सिंह ने इस अपील में उच्च न्यायालय की एकल पीठ के 30 अप्रैल के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें कांग्रेस के चुनाव चिन्ह हाथ के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति की गुहार वाली उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. एकल पीठ ने कहा था कि यह याचिका नियम-कायदों को लेकर गलतफहमी के चलते दायर की गई है.

3 मई को हो सकती है सुनवाई

उच्च न्यायालय की युगल पीठ सिंह की अपील पर तीन मई (शुक्रवार) को सुनवाई कर सकती है. सिंह का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी द्वारा छह दिन पहले खारिज किया जा चुका है, लेकिन उन्होंने इंदौर के कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम के नामांकन वापस लेने का हवाला देते हुए अदालत से गुहार लगायी है कि उन्हें पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए.

मोती सिंह की ओर से रखा गया पक्ष

सिंह की अपील में कहा गया है कि निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन पत्र दस्तावेजों की छानबीन के दौरान 26 अप्रैल को कथित रूप से त्रुटिपूर्ण तरीके से केवल इस आधार पर खारिज कर दिया था कि वह महज वैकल्पिक उम्मीदवार हैं,जबकि बम पार्टी के स्वीकृत प्रत्याशी हैं.

अपील में कहा गया है कि चूंकि बम ने नामांकन वापस ले लिया है, इसलिए चुनाव चिन्ह (आरक्षण एवं आवंटन आदेश) 1968 के तहत सिंह को कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पंजे के साथ के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए.

अक्षय कांति बम 29 अप्रैल को भाजपा में शामिल

बम ने इंदौर में कांग्रेस को तगड़ा झटका देते हुए नामांकन वापसी की आखिरी तारीख 29 अप्रैल को अपना नामांकन वापस ले लिया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे. इसके साथ ही भाजपा का मजबूत गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर कांग्रेस की चुनावी चुनौती समाप्त हो गई जहां वह पिछले 35 साल से जीत की बाट जोह रही है.



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