दिल्ली हाईकोर्ट ने 2021 के किसान विरोध प्रदर्शन के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज टूलकिट मामले में दो लोगों के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को रद्द कर दिया है. जस्टिस संजीव नरूला ने थिलक श्री कृपानंद और शांतुनु मुलुक के खिलाफ एलओसी को रद्द करते हुए कहा कि जांच लगभग चार साल से चल रही है और अभी तक उनके खिलाफ कोई आरोपपत्र दायर नहीं किया गया है.
अदालत ने कहा रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि याचिकाकर्ताओं ने कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए सहयोग नहीं किया या कोई प्रयास नहीं किया. ऐसी परिस्थितियों में एलओसी जारी करना जो फरार व्यक्तियों को कानूनी कार्यवाही से बचने से रोकने के लिए एक असाधारण उपाय है, उन व्यक्तियों के खिलाफ उचित नहीं ठहराया जा सकता. अदालत ने कहा दोनों ने भागने या न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने का कोई इरादा नहीं दिखाया है.
कृपानंद कभी महीं आये जांच के लिए
अदालत ने कहा कृपानंद को कभी भी जांच के लिए बुलाया ही नहीं गया, मुलुक को 2021 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी और जांच के लिए बुलाया गया. उनका कहना था कि दोनों ने चल रही जांच में पूरा सहयोग किया.
प्रदर्शनों को लेकर दर्ज की गई एफआईआर में, दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि 2021 के किसान विरोध के दौरान सोशल मीडिया पर कई “टूलकिट दस्तावेज” प्रसारित किए गए थे, जिन्हें कथित तौर पर “पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन” नामक एक संगठन द्वारा बनाया गया था और इसके निर्माताओं का उद्देश्य भारत के खिलाफ असंतोष को बढ़ावा देना था.
अभियोजन पक्ष के अनुसार विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का कारण “दस्तावेज में निहित हिंसा भड़काने” को बताया गया था, जिसे कथित तौर पर दिशा रवि ने बनाया था. रवि को इस मामले में जमानत मिल गई है.
-भारत एक्सप्रेस
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