दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला की शिकायत को खारिज करने के सत्र अदालत के फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें उसने दावा किया था कि वह बिना सर्जरी या अस्पताल जाए आयुर्वेदिक व होमियोपैथी दवाओं का सेवन कर अपने सिर व दिल में लगे लगभग 25 गोलियों के घावों से बच गई.
जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने महिला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करने वाले सत्र अदालत के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें मजिस्ट्रेट की अदालत के उसकी शिकायत खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी. मजिस्ट्रेट ने भी उसके शिकायत को खारिज कर दिया था. साथ ही आरोपी बनाए गए लोगों को समन जारी करने से इनकार कर दिया था.
25 गोलियां लगने के बावजूद अस्पताल नहीं गई
सेंशन ने कहा था कि यह बिल्कुल अविसनीय है कि जिस व्यक्ति को 25 गोलियां लगी हों, वह होश में रहते हुए भी खून बहते हुए अपने घर वापस जा सकता है, फिर पूरी रात अच्छी नींद ले सकता है. यह एक परीकथा की तरह लगता है कि उसके सिर और हाथों में लगी गोलियां केवल होम्योपैथिक की कुछ गोलियां खाने के कारण अपने आप निकल गई. वह महिला के तकरे में कोई सुसंगतता या प्रमाणिकता नहीं देख पा रहा है. न्यायमूर्ति ने पाया कि मजिस्ट्रेट व सत्र अदालत ने महिला के मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसकी दलीलें और सबूत पहली नजर में अविनीय लगते हैं.
शिकायतकर्ता महिला ने दावा किया था कि उसने अपने ऊपर हमले से एक महीने पहले चोटों को ठीक करने के लिए ‘अर्निका 30‘ होम्योपैथिक दवा ली थी. साथ ही ऊतक की मरम्मत के लिए ‘सिलिसिया 30‘ लिया. उनके सिर दिल और हाथ से गोलियां निकल गई, जिसके बाद वह धीरे-धीरे ठीक हो गई. महिला ने यह भी कहा था कि उसे गोली लगने के आधे घंटे के बाद होश आया और वह घर चली गई. उसके सिर से खून बह रहा था जिसपर उसने ‘हल्दी‘ लगाई. अगले दिन दोपहर तक कुछ भी खाने से परहेज किया. उसने किसी अस्पताल या डॉक्टर या सर्जन और यहां तक कि होम्योपैथिक डाक्टर से भी मुलाकात नहीं की. उसके अगले दिन रिक्शा में अदालत पहुंची.
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-भारत एक्सप्रेस
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