सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में जातीय हिंसा के पीड़ितों के राहत और पुनर्वास को लेकर गठित कमेटी का कार्यकाल को 31 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया है. जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह साफ किया है कि मणिपुर हिंसा से जुड़े ट्रांसफर से संबंधित मामले की सुनवाई गुवाहाटी में जारी रहेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी में पूर्व जस्टिस गीता मित्तल के अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस शालिनी पी जोशी और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस आशा मेनन शामिल है. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2023 को पीड़ितों के राहत और पुनर्वास तथा उन्हें मुआवजा देने की निगरानी के लिए हाई कोर्ट की तीन पूर्व महिला जस्टिस की एक कमेटी गठित करने का आदेश दिया था.
3 सदस्यीय जांच का गठन
इसके अलावे महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस प्रमुख दत्तात्रेय पडसलगीकर को आपराधिक मामलों की जांच की निगरानी करने को कहा था. हालांकि गृह मंत्रालय ने भी मणिपुर में चल रही जातीय हिंसा की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था. गृह मंत्रालय द्वारा गठित कमेटी में गुवाहाटी हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा के अलावे पूर्व आईएएस हिमांशु शेखर और पूर्व आईपीएस आलोक प्रभाकर शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले पूर्व जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता में गठित कमेटी का कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ा दिया था. बता दें कि मई 2023 से जातीय हिंसा से जूझ रहा है. जातीय हिंसा के कारण यहां 200 से अधिक लोग मारे गए है. कई सौ घायल हुए है और हजारों लोग विस्थापित हुए है.
-भारत एक्सप्रेस
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