दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को निर्देश दिया कि वह दो दिनों के भीतर भारत से एलएलबी करने वाले एक कोरियाई नागरिक को वकालत के लिए पंजीकृत करे. जस्टिस प्रतिबा मनिंदर सिंह एवं जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता डेयंग जंग की भारत में पंजीकरण की याचिका को स्वीकार करने वाले एकल पीठ के आदेश पर कोई रोक नहीं है, इसलिए बीसीआई उनके पंजीकरण को रोक नहीं सकता. कोर्ट 28 मार्च को अगली सुनवाई करेगा.
याचिकाकर्ता जंग ने पंजीकरण के लिए पहले दिल्ली बार काउंसिल (बीसीडी) से संपर्क किया था, लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया था. इसके बाद उन्होंने बीसीआई को एक अभ्यावेदन भेजा, लेकिन उसे भी अस्वीकार कर दिया गया. फिर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उन्होंने भारतीय संस्थान से कानून की डिग्री हासिल की है. इसलिए बीसीआई की ओर से उन्हें बीसीडी की सूची में बतौर अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत करने के लिए योग्य मानने से इनकार करना गलत है.
याचिकाकर्ता ने कहा कि कोरिया में कानून की डिग्री प्राप्त करने वाला भारतीय नागरिक कोरिया में वकालत करने का हकदार है. इसलिए अधिवक्ता अधिनियम की धारा 24 के अनुसार भारत में कानून की पढ़ाई करने वाले कोरियाई नागरिक को भारत में वकालत करने की अनुमति दी जानी चाहिए. न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने 30 मई, 2023 को बीसीडी में पंजीकरण की मांग करने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया था. उसे ही दो सदस्यीय पीठ के समक्ष चुनौती दी गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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