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बच्चों को हुक्का और शराब परोसने वाले क्लब मालिकों को दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पढ़ें पूरा मामला

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्लब मालिकों पर बच्चों को हुक्का व शराब परोसने, सबूत मिटाने और अपराध छुपाने के आरोपों को सही ठहराया. सीसीटीवी फुटेज नष्ट करने और नाबालिगों को हानि पहुँचाने के आरोप में कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा.

club owners accused of selling liquor, hookah to minors

दिल्ली हाई कोर्ट ने बच्चों को हुक्का और शराब परोसने के दो आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दोनों के खिलाफ आरोप तय करने के फैसले को बरकरार रखा है. वे दो क्लबों के मालिक व भागीदार है जिन्होंने आय बढ़ाने के लिए बच्चों को हुक्का व शराब परोसने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि दोनों ने कथित तौर पर अपने गतिविधियों को दिल्ली पुलिस से छिपाने के लिए जानबूझकर सीसीटीवी रिकार्डिंग को नष्ट कर दिया है. आरोप तय करने के चरण में सिर्फ प्रथम दृष्टिकोण लेना होता है कि अपराध नहा है या नहीं. अपराध के दौरान निभाई गई भूमिका व उसमें आरोपियों की संलिप्तता व उनके बचाव को मुकदमे के दौरान ही समझा जा सकता है.

अदालत ने यह कहते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा और उनकी अपील को खारिज कर दिया. अदालत ने इसके साथ ही दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 201 और 34 (साक्ष्य यानी सीसीटीवी फुटेज को नष्ट करना), धारा 19 (1) के साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 21 (अपराधों की रिपोर्ट न करने), जेजे अधिनियम की धारा 77 (बच्चे को मादक शराब या मादक पदार्थ या मनोदैहिक पदार्थ लेने के लिए दंड), दिल्ली आबकारी अधिनियम की धारा 42 (नाबालिगों को काम पर रखने या उन्हें शराब बेचने के लिए दंड) और दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा110 के साथ धारा 28 के तहत लगाए गए आरोपों को बरकरार रखा है.

13 वर्षीय लापता लड़की की शिकायत से खुला मामला

लापता 13 वर्षीय लड़की के मां की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था कि नाबालिग को क्लबों में हुक्का व शराब पड़ोसी गई थी. उसी मामले में दोनों के खिलाफ निचली अदालत ने आरोप तय किए थे, जिसे नरेश कुमार जैन ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.

लड़की ने कहा था कि वह अक्सर याचिकाकर्ताओं के क्लबों में जाती थी और फ्लैट में रात भर रुकती थी. एक अन्य आरोपी ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे. इसी तरह अन्य नाबालिग पीड़ितों ने भी क्लबों में हुक्का और शराब का सेवन करती थी और पुलिस के खोजे जाने के वे कई जगहों पर रही थी. निचली अदालत ने उनके खिलाफ इस आधार पर आरोप तय किए थे कि वे क्लबों के मालिक थे और उन्होंने अपने लाउंज के सीसीटीवी फुटेज को नष्ट करके सबूतों को मिटाया है. वे पीड़ित केलापता होने की सूचना भी नहीं दी थी और अपने बार में अवैध हुक्का और शराब भी परोसते थे.

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-भारत एक्सप्रेस 



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