तीस हजारी कोर्ट ने झूठी गवाही देकर एक व्यक्ति को बलात्कार का आरोप लगाकर उसे फंसाने की कोशिश करने वाली महिला के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. साथ ही आरोपी को बरी कर दिया. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल ने कहा कि प्रतिष्ठा बनाने में पूरा जीवन लग जाता है, लेकिन कुछ झूठ उसे खतम कर देता है.
आरोपी को केवल बरी कर देने से उसकी पीड़ा का भरपाई नहीं हो सकता. उसे झूठे मामले के आधार पर बलात्कार एवं धमकी जैसे अपराध के लिए मुकदमे का सामना करना पड़ा है. इसलिए महिला के खिलाफ कार्रवाई किया जाए. न्यायाधीश ने इसके साथ ही संबंधित थानेदार से महिला के खिलाफ झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया.
अदालत के सामने दिया गलत बयान
आरोपी के खिलाफ 23-24 नवंबर, 2019 की रात को एक होटल में शिकायतकर्ता के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया गया था. न्यायाधीश ने कहा कि पेश साक्ष्य से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता महिला ने इस अदालत के समक्ष गलत बयान दिया है. साथ ही बलात्कार/धमकी की झूठी कहानी गढी. उसके बयानों में भी विरोधाभास है. महिला ने पहले भी कई लोगों के खिलाफ भी बलात्कार व छेड़छाड़ के इसी तरह के छह समान मामले दर्ज कराए हैं. दिल्ली पुलिस के अनुसार महिला छेड़छाड़ की झूठी शिकायत करने की आदी है.
-भारत एक्सप्रेस
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