दिल्ली के हौज खास स्थित डियर पार्क में बचे हिरणों को दूसरे राज्यों के जंगलों में स्थानांतरित करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया है. जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने डीडीए सहित अन्य प्राधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 16 मई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. साथ ही कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि पार्क में मौजूद हिरणों की उचित देखभाल की जानी चाहिए. यह याचिका एक गैर सरकारी संगठन न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी ने दायर की है.
एनजीओ ने जताई गंभीर चिंता
याचिका में कहा गया है कि हौज खास से लगभग 600 हिरणों को उचित आवास आकलन, पशु चिकित्सा जांच या गर्भवती हिरणों और उनके बच्चों जैसे कमजोर समूहों के लिए सुरक्षा उपायों के बिना स्थानांतरित किए जाने की संभावना है. इससे पहले एनजीओ की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. जिस याचिका पर सुनवाई से कोर्ट ने इनकार कर दिया था.
मानसून में विस्थापन पर जताई आपत्ति
एनजीओ की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह मॉनसून के मौजूदा सीजन में हिरणों को यहां से कही और विस्थापित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दे. याचिकाकर्ता ने दावा किया हैं कि ऐसा करना सेंट्रल जू ऑथोरिटी की गाइडलाइंस के खिलाफ है. याचिका में कहा गया है कि अब तक तीन समूहों के हिरणों को वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन करते हुए राजस्थान के अभयारण्यों में भेजा जा चुका है, जो न केवल अनुचित है, बल्कि ये बेजुबानों के जीवन के लिए खतरनाक भी हो सकता है.
डीडीए ने लिया था फैसला
याचिकाकर्ता का कहना है कि डीडीए और अन्य प्राधिकरणों ने हिरणों के स्थानांतरण में न तो किसी आवासीय मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई, न ही इस बात पर ध्यान दिया कि गर्भवती हिरणों और नवजात शावकों को क्या जोखिम हो सकता है. इसके चलते यह कदम वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है. दरअसल डीडीए ने दिल्ली के हौज खास क्षेत्र स्थित हिरण पार्क में बचे हिरणों को राजस्थान के जंगलों में स्थानांतरित करने का फैसला लिया था.
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