दिल्ली हाईकोर्ट.
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक ट्रेडमार्क मामले में जर्मन सांस्कृतिक संगठन गोएथे-इंस्टीट्यूट को एक भारतीय संस्था के खिलाफ अंतरिम राहत प्रदान की है, जिसमें उसने संस्थान से जर्मन भाषा पढ़ाने के लिए उसके नाम मैक्स म्यूलर चिन्ह का उपयोग न करने की मांग की थी. कोर्ट 13 मई को सुनवाई करेगा.
गोएथे-इंस्टीट्यूट एक जर्मन मूल की संस्था
गोएथे-इंस्टीट्यूट एक जर्मन मूल की संस्था है जो कई देशों में जर्मन भाषा का पाठ्यक्रम चलाता है. भारत में यह पाठ्यक्रम मैक्स म्यूलर भवन नामक केंद्रों के माध्यम से चलाता है. जस्टिस मिनी पुष्करणा ने 6 मई को अपने अंतरिम आदेश में अभिषेक यादव की भारतीय संस्थान से अपना जर्मन भाषा पाठ्यक्रम चलाने के दौरान मैक्स म्यूलर, मैक्स म्युलर संस्थान या इसी तरह के नामों का उपयोग करने से रोक दिया.
1957 से चल रहा गोएथे की संस्था मैक्स म्यूलर भवन
उन्होंने कहा कि गोएथे संस्थान ने प्रथम दृष्टया अपने चिन्ह मैक्स म्यूलर भवन के वर्षों उपयोग किए जाने को स्पष्ट रूप से स्थापित किया गया है. यह पूरे भारत में इसकी जर्मन भाषा शिक्षण सेवाओं को मुकदमा लंबित रहने के दौरान विवादित चिन्हों, मैक्स म्यूलर/मैक्स म्यूलर संस्थान का उपयोग करने से रोकने के लिए अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की जाती है. गोएथे की संस्था मैक्स म्यूलर भवन भारत में वर्ष 1957 से चल रहा है, जिसकी पहली स्थापना कोलकाता में हुआ था और पूरे भारत में उसके छह संस्थान है.
-भारत एक्सप्रेस
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