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रोहिंग्या शरणार्थियों को समुद्र में फेंकने के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, तीन जजों की बेंच करेगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या शरणार्थियों को जबरन समुद्र में फेंकने के आरोपों पर याचिकाकर्ता को फटकार लगाई और सबूतों की मांग की. कोर्ट ने तीन जजों की बेंच बनाकर 31 जुलाई को अगली सुनवाई तय की है.

Rohingya Immigrants in Delhi
Prashant Rai Edited by Prashant Rai

रोहिंग्या शरणार्थियों को कथित तौर पर जबरन निर्वासित कर समुद्र में फेंक दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई है और कहा कि गंभीर आरोपों के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं. कोर्ट ने टिप्पणी की कि देश कठिन दौर से गुजर रहा है और इस तरह की “मनमानी कहानियां” गढ़कर कोर्ट को बार-बार गुमराह करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.

इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच कर रही थी. सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता से तीखे सवाल किए. कोर्ट ने पूछा, “क्या आपके पास कोई सबूत है कि रोहिंग्या शरणार्थियों को समुद्र में फेंका गया? क्या किसी ने तस्वीरें लीं या वीडियो बनाया?”

यह याचिका रोहिंग्या समुदाय के मोहम्मद इस्माइल की ओर से दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि भारत ने 43 रोहिंग्या शरणार्थियों को जबरन समुद्र में फेंककर म्यांमार भेज दिया, और ये लोग किसी तरह लाइफ जैकेट के सहारे तैरते हुए म्यांमार पहुंचे.

कोर्ट की तीखी प्रतिक्रिया

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस से पूछा कि उन्होंने ये जानकारी कहां से प्राप्त की है. जब गोंजाल्विस ने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें रोहिंग्याओं को पीड़ित शरणार्थी बताया गया है और जबरन निर्वासन से बचाने की सिफारिश की गई है, तब भी कोर्ट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के मामलों को प्रभावित नहीं कर सकती.

जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट रूप से कहा, “अगर आपको गरीबों की इतनी ही चिंता है, तो उनके लिए खुद कुछ क्यों नहीं करते?”

वरिष्ठ वकील गोंजाल्विस ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में स्वतंत्र जांच का आदेश देने और निर्वासन पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों से सहमति नहीं जताई. पीठ ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर तीन दिनों तक बहस हो चुकी है, और यह स्पष्ट नहीं है कि ये लोग वाकई शरणार्थी हैं या कुछ और. हालांकि याचिकाकर्ता का दावा है कि ये लोग संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त शरणार्थी हैं. कोर्ट ने इस मामले को तीन जजों की बड़ी बेंच को सौंपते हुए अगली सुनवाई की तारीख 31 जुलाई तय की है.

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-भारत एक्सप्रेस



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