पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव.
लैंड फॉर जॉब मामले में कथित आरोपी और पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. लालू प्रसाद यादव ने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने की मांग की है. कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह के बाद कहा कि मामले में बाद में आदेश पारित किया जाएगा.
मामले की सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआई ने बिना आवश्यक.मंजूरी के जांच जारी रखा है. जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बिना पूर्व अनुमति के जांच शुरू नहीं कि जा सकती, जो एक अनिवार्य शर्त है. सिब्बल ने यह भी कहा कि भले ही अन्य मामलों में मंजूरी ली गई हो, लेकिन इस विशेष मामले में मंजूरी नही ली गई है.
कानूनी और राजनीतिक महत्व का मामला
यह मामला राजनीतिक और कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दर्शाता है कि कैसे कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए और क्या कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है. सीबीआई द्वारा दायर अंतिम सप्लिमेंट्री चार्जशीट में 78 लोगों को आरोपी बनाया गया है.
सीबीआई के मुताबिक 38 कैंडिडेट्स है इसके अलावे कुछ अधिकारी शामिल है. सीबीआई ने 6 मार्च को इस मामले में तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया था. जिसमे भोला यादव को आरोपी बनाया गया है. सीबीआई द्वारा दाखिल पूरक आरोप पत्र में कहा गया है कि भोला यादव लालू प्रसाद यादव के सचिव रह चुके है और वही सभी काम देखते थे. भोला यादव ही अधिकारियों को निर्देश देते थे.
इस मामले में लालू प्रसाद यादव सहित उनके परिवार के पांच सदस्य आरोपी है. इसमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव शामिल है. सीबीआई से जुड़े मामले में कोर्ट ने 4 अक्टूबर 2023 को तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, और राबड़ी देवी को जमानत दी थी.
लालू प्रसाद यादव पर नौकरी देने के बदले जमीन लेने के आरोप
कोर्ट ने 22 सितंबर 2023 को सीबीआई की ओर से दाखिल दूसरी सप्लिमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. 3 जुलाई 2023 को सीबीआई ने सप्लिमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया था. कोर्ट ने 27 फरवरी 2023 को इन तीनों आरोपियों समेत सभी आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था.
7 अक्टूबर 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था. राजद प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते बगैर किसी विज्ञापन के कई लोगों को रेलवे में नौकरियां दी. नौकरी देने के बदले उनसे या उनके परिवार के सदस्यों से लालू प्रसाद यादव ने उनकी जमीनें अपने परिवार के नाम लिखवा ली. इस मामले में सीबीआई और ईडी दोनों जांच कर रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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