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सुप्रीम कोर्ट ने बकरीद पर महाराष्ट्र के विशालगढ़ किले में दरगाह पर कुर्बानी के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने विशालगढ़ किले में कुर्बानी की अनुमति को चुनौती देने वाली याचिका पर त्वरित सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में पहले ही शर्तें लागू हैं और जल्दबाज़ी की कोई वजह नहीं है.

Supreme Court
Edited by Akansha

कोल्हापुर जिले के विशालगढ़ किले में कुर्बानी देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि इतनी जल्दी क्या है. कोर्ट ने कहा कि संरक्षित स्मारकों में विभिन्न धार्मिक गतिविधियों की अनुमति है.  कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में शर्ते लगाई गई हैं.

सुप्रीम कोर्ट से की थी आज ही सुनवाई की मांग

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से आज ही सुनवाई करने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने इनकार कर दिया. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से कहा कि यह संरक्षित स्मारक है, यहां कुर्बानी की अनुमति नही मिलनी चाहिए. यह फैसला बकरीद और इस दरगाह पर होने वाले उर्स के मद्देनजर दिया गया है. इस किले के अंदर हिन्दू लगातार मुस्लिम अतिक्रमण की बात दोहराते रहे हैं.

हाईकोर्ट ने ट्रस्ट को दी थी सीमित अनुमति

बॉम्बे हाई कोर्ट ने हजरत पीर मलिक रेहान दरगाह ट्रस्ट की अंतरिम याचिका पर सुनवाई के बाद कुछ शर्तों से साथ अनुमति दी है. कोर्ट ने कहा था कि यह आदेश न केवल दरगाह न्यास पर लागू होगा, बल्कि अन्य श्रद्धालुओं पर भी लागू होगा. ट्रस्ट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों पुरातत्व निदेशालय, कोल्हापुर पुलिस अधीक्षक और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा दरगाह परिसर में पशु और पक्षियों की बलि पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती दी थी.

हर साल होता है उर्स, दो बार मनाई जाती है पुण्यतिथि

अधिकारियों ने कहा था कि किला एक संरक्षित स्मारक है, इसलिए यहां जानवरों और पक्षियों की बलि नही दी जा सकती है. हर साल दरगाह पर तीन दिनों तक उर्स मनाया जाता है, जो साल में दो बार पीर साहब की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में मनाया जाता है-एक बार जून में ईद-उल-अजहा के बाद और हर साल 12 से 14 जनवरी तक.

-भारत एक्सप्रेस 



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