Bharat Express DD Free Dish

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ग्रीन पार्क क्षेत्र में जलभराव रोकने के लिए एम्स से होकर गुजरेगी नई सीवर लाइन

दिल्ली हाईकोर्ट ने ग्रीन पार्क एक्सटेंशन और आसपास के इलाकों में जलभराव से राहत के लिए एम्स परिसर से होकर नई सीवर लाइन बिछाने के निर्देश दिए हैं. डीजेबी और एमसीडी को मानसून को देखते हुए तत्काल सफाई और गाद निकालने के निर्देश भी दिए गए हैं.

Delhi HC

दिल्ली हाईकोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में ग्रीन पार्क एक्सटेंशन एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में जलभराव को नियंत्रित करने के लिए एम्स परिसर से गुजरते हुए नई सीवर लाइन बिछाने के निर्देश दिए हैं. जस्टिस प्रतिबा मनिंदर सिंह एवं जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने कहा कि व्यापक जनिहत में एम्स आवासीय परिसर में नई सीवर लाइन बिछाई जानी जरूरी है.

साथ ही कहा कि वर्तमान मानसून को देखते हुए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) व दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) पहले से मौजूद सीवर लाइन एवं स्टार्म वाटर ड्रेन की नियमित सफाई व गाद निकालने का काम जारी रखे जिससे क्षेत्र में जल भराव नहीं हो.

अगली सुनवाई 28 जुलाई को, रिपोर्ट पेश करने का आदेश

कोर्ट 28 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. अदालत ने डीजेबी के मुख्य अभियंता और एमसीडी के आयुक्त व अन्य अधिकारियों के परामर्श से और विशेष रूप से एम्स (नोडल अधिकारी) यानी अधीक्षक अभियंता दीपक भुटाले की संतुष्टि को लेकर सीवर लाइन और स्टॉर्म वाटर ड्रेन बिछाने की योजना पर एक रिपोर्ट पेश करें.

रिपोर्ट में सीवर लाइन की डिजाइनिंग का प्रस्ताव, ग्रीन पार्क एक्सटेंशन से एम्स परिसर के साथ अरबिंदो मार्ग तक इसे जोड़ने का तरीका भी शामिल होना चाहिए. उपरोक्त रिपोर्ट एम्स के साथ मिलकर तैयार की जाए जिससे सीवर लाइन बिछाने के दौरान एम्स के आवासीय परिसर में रहने वाले निवासियों को कम से कम परेशानी हो.

याचिकाकर्ता ने उठाई थी जलभराव की समस्या

पीठ को बताया गया था कि सीवर लाइन को नियमित साफ करने से ग्रीन पार्क एक्सटेंशन क्षेत्र में जलभराव नहीं हुआ है. इसके अलावा डीजेबी अधिकारियों ने यह भी कहा कि एम्स में बिछाई जाने वाली सीवर लाइन 200 मीटर से अधिक लंबी नहीं होगी और उसमें उसका 130 मीटर जमीन की ही जरूरत पड़ेगी.

इसपर पीठ ने निर्देश दिया कि डीजेबी के मुख्य अभियंता की ओर से एम्स, एमसीडी, एनडीएमसी, पीडब्ल्यूडी व दिल्ली सरकार के वन विभाग के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के साथ बैठक की जाए, जिससे सीवरलाइन के रास्ते में पड़ने वाले पेड़ों को उखाड़ने और फिर से लगाने के लिए जरूरत पड़ने पर उसकी मंजूरी पहले से लिया जा सके.

कोर्ट ने यह निर्देश शैलेंद्र भटनागर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया जिन्होंने ग्रीन पार्क एक्सटेंशन व उसके आसपास के क्षेत्रों में जलभराव से निजात दिलाने की मांग की है.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: जमानत के बावजूद रिहाई नहीं, यूपी डीजी जेल और गाजियाबाद जेलर तलब

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read