सुप्रीम कोर्ट ने नीट-पीजी 2024 के एक अभ्यार्थी द्वारा 27 लाख रुपए फीस देने के बावजूद रिपोर्ट करने में देरी के कारण प्रवेश से वंचित करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद अभ्यार्थी को बड़ी राहत दी है. जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने संबंधित मेडिकल कॉलेज को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता 26 जून को पीजी क्लास में भाग लेने की अनुमति दे.
कोर्ट ने यह निर्देश आईकेयर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, हल्दिया को उम्मीदवार को स्वीकार करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने अजीबोगरीब तथ्यों पर ध्यान देते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में यह फैसला दिया है.
याचिकाकर्ता के मुताबिक प्रवेश की अंतिम तिथि 20 मार्च 2025 थी, लेकिन वह 27 मार्च को ही कॉलेज में उपस्थित हुआ. याचिकाकर्ता ने कहा कि देरी कॉलेज द्वारा मांगी गई अतिरिक्त फीस के कारण हुई है. लेकिन कॉलेज ने इसे मानने से इनकार कर दिया. जबकि कॉलेज की दलील है कि अभ्यार्थी ने अपना एमसीसी कार्ड जमा नही जिसके कारण प्रवेश को अस्वीकार कर दिया गया.
मामले की सुनवाई के दौरान मेडिकल कॉलेज की ओर से पेश वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता अभ्यार्थी को आवंटित सीट अभी भी खाली है और किसी अन्य उम्मीदवार को नहीं दी गई है.
बता दें कि मेडिकल कॉलेज के इस फैसले के खिलाफ सबसे पहले कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने अभ्यार्थीकी ओर से दी गई सभी दलीलों को खारिज करते हुए मेडिकल कॉलेज के हक में फैसला सुनाया था. जिसके बाद अभ्यार्थी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसकी याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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