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वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारतीय बाजारों में तेजी आने की संभावना: मॉर्गन स्टेनली

मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, भारत में लगातार सुधार के संकेत दिख रहे हैं. सरकारी खर्च बढ़ रहा है और आरबीआई अधिक सहायक या ‘शांत’ नीति रुख की ओर बढ़ रहा है. यह, मुद्रास्फीति में कमी के साथ मिलकर शेयर बाजार के लिए अच्छा माहौल बना रहा है.

Morgan Stanley

मॉर्गन स्टेनली ने शुक्रवार को एक नोट में कहा कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट के बजाय तेजी आने की अधिक संभावना है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म भारतीय इक्विटी पर आशावादी बनी हुई है. फर्म को उम्मीद है कि मजबूत विकास डेटा, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सहायक कदम और उम्मीद से बेहतर कॉर्पोरेट आय जुलाई से बाजार को ऊपर ले जाएगी.

फर्म के अनुसार, भारत में लगातार सुधार के संकेत दिख रहे हैं. सरकारी खर्च बढ़ रहा है और आरबीआई अधिक सहायक या ‘शांत’ नीति रुख की ओर बढ़ रहा है. यह, मुद्रास्फीति में कमी के साथ मिलकर शेयर बाजार के लिए अच्छा माहौल बना रहा है.

ब्रोकरेज फर्म का यह भी मानना है कि कम ब्याज दरें बैंकों को अधिक उधार देने में मदद करेंगी, जिससे उधार वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा. इसके अलावा, अगर वैश्विक अनिश्चितताएं कम होती हैं, तो भारतीय कंपनियां नई परियोजनाओं में अधिक निवेश करना शुरू कर सकती हैं. आगामी कॉर्पोरेट आय सीजन एक प्रमुख ट्रिगर हो सकता है.

RBI ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कर सकता है कटौती

मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि कई कंपनियां कम आधार तुलना, बेहतर दक्षता और उपभोक्ताओं की स्थिर मांग के कारण बाजार की उम्मीदों को पार कर जाएंगी. आगे देखते हुए, आरबीआई चौथी तिमाही में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, जो बाजार की धारणा को मजबूत करेगा. हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी चेतावनी दी है कि वैश्विक कारक भारत के बाजार की चाल में बड़ी भूमिका निभाते रहेंगे.

दुनिया भर में तनाव, व्यापार नीतियों में बदलाव या विकसित देशों में स्लोडाउन भारतीय शेयरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है. भले ही भारत को आम तौर पर अपेक्षाकृत स्थिर बाजार के रूप में देखा जाता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर बड़ी बिकवाली से घरेलू इक्विटी पर असर पड़ेगा.

उदाहरण के लिए, अगर तेल की कीमतों में तेज गिरावट आती है, तो यह वैश्विक आर्थिक संकट का संकेत हो सकता है, जो बाजारों के लिए अच्छा नहीं होगा.

इन जोखिमों के बावजूद, मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि खुदरा निवेशकों की मजबूत भागीदारी और निरंतर विदेशी रुचि किसी भी गिरावट को कम करने में मदद करेगी. भारतीय इक्विटी को ‘कम प्रीमियम’ और जीएसटी में बदलाव और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास जैसे दीर्घकालिक सुधारों से भी लाभ होता है, जो निवेशकों के विश्वास को बढ़ाते हैं.

हालांकि, मौजूदा वैल्यूएशन ऐतिहासिक स्तरों की तुलना में अधिक हैं, लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि मजबूत आय परिदृश्य को देखते हुए यह उचित है. मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि दीर्घावधि में भारत की स्थिर नीतियां और विकास क्षमता इसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आकर्षक बाजारों में से एक बनाती हैं.


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-भारत एक्सप्रेस



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