Sawan 2025: सावन का पवित्र महीना आज (11 जुलाई) से शुरू हो चुका है. ये पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और भक्त खासतौर पर भोलेनाथ की पूजा अर्चना करते हैं. सावन में भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए लोग वृत, पूजा और कई तरह के अन्य उपाय करते हैं.
इसी के साथ Sawan के महीने में झूला झूलन की भी एक काफी प्रचलित मान्यता है. खासकर लड़कियां और औरतें हरियाली तीज या कई दूसरे अवसरों पर गीत गाती हैं और झूला झूलती हैं. तो आईए आज आपको इसी महत्व के बार में बताते हैं और साथ ही बताएंगे की ये परंपरा कब और क्यों शुरू की गई थी.
मां पार्वती से जुड़ी है झूला-झूलने की मान्यता
हिंदू धर्म के अनुसार सावन का महीना माता पार्वती और शिव जी के मिलन का प्रतीक माना जाता है. दरअसल सावन के महीने में माता पार्वती अपने मायके गई थीं. जहां उन्होंने अपनी सहेलियों के साथ झूला-झूलकर खूब आनंद लिया.
इसी दिन के बाद से सावन के महीने में झूला-झूलने की परंपरा शुरू हो गई. ये खासतौर पर लड़कीयों और महिलाओं के लिए काफी खास माना गया है. सभी सावन के दिनों में मिलकर झूला डालती हैं और मां गौरी का आशीर्वीद प्राप्त करती हैं.
श्री कृष्ण और राधा से भी जुड़ा है महत्व
कई और मान्यताओं के अनुसार झूला-झूलने वाली इस परंपरा की शुरुआत भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी ने की थी.
दरअसल सावन के महीने में भगवान कृष्ण, राधा रानी को झूला झुलाते थे जिसके बाद से ये परंपरा शुरू हो गई. माना जाता है कि जो भक्त इस पावन महीने में झूला झूलते हैं और भगवान से कुछ मांगते हैं तो वो जरूर पूरा होता है.
कजरी तीज पर झूला झूलने का महत्व
श्रावण मास के सोमवार वाले दिन स्त्रियां विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा अर्चना करती हैं. साथ ही उपवास रखने के साथ-साथ झूला झूलते हुए भगवान शिव और पार्वती को याद करती हैं.
इसके अलावा कजरी तीज पर झूला झूलने का भी काफी महत्व माना गया है. इस दिन स्त्रियां गीत गाते हुए झूला झूलती हैं और अपने पति की लंबी उम्र का कामना करती हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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