झारखंड हाईकोर्ट (फोटो विकिपीडिया)
झारखंड हाईकोर्ट के खिलाफ शिकायत एक फिर सुप्रीम कोर्ट पहुच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने दायर याचिका पर सुनवाई को तैयार हो गया है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दोषियों की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनकी आपराधिक अपीलों पर फैसला सुरक्षित होने के बावजूद, झारखंड हाईकोर्ट ने दो-तीन साल बीत जाने के बावजूद अभी तक फैसला नही सुनाया है. दोषियों ने हाईकोर्ट में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट 2022-2023 में फैसला सुरक्षित रखा था, लेकिन अभी तक फैसला नही सुनाया है.
अनुच्छेद 21 के उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फैसले न सुनाए जाने से संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन होता है, जिसका एक पहलू शीघ्र सुनवाई के अधिकार है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने फौजिया शकील की दलील पर गौर करने के बाद सजा निलंबन की मांग की है. अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि सभी 10 सुरक्षित मामलों में हाईकोर्ट के एक ही जज सुनवाई कर रहे है.
याचिकककर्ता के मुताबिक 10 में.से 9 दोषी बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार, होटवार, रांची में बंद हैं. दसवां दोषी दुमका केंद्रीय कारागार में बंद था, लेकिन अपील लंबित रहने के दौरान उसकी जमानत याचिका हाईकोर्ट द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद उसे इस साल मई में रिहा कर दिया गया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा 67 आपराधिक मामलों में फैसला सुरक्षित रखने के बाद अब तक फैसला नही देने पर आश्चर्य व्यक्त किया था.
सुप्रीम कोर्ट पहले भी जता चुका है नाराज़गी
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी हाईकोर्ट से एक महीने में जवाब देने को कहा था. कोर्ट ने कहा था कि वह इस मुद्दे पर कुछ अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि एकल पीठ के न्यायाधीश के समक्ष आदेश सुरक्षित रखे जाने के बावजूद 11 आपराधिक अपीलों पर फैसला नहीं सुनाया गया है. सुप्रीम कोर्ट आजीवन कारावास की सजा पाने वाले 4 दोषियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
याचिका में दावा किया गया था कि झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील पर आदेश सुरक्षित रखा था, लेकिन फैसला नहीं सुनाया, जिसकी वजह से वे सजा में छूट का लाभ लेने में सक्षम नहीं थे. सुप्रीम कोर्ट चार याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है.
चारों याचिकाकर्ता बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार, होटवार, रांची में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं. वे अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय से संबंधित है. तीन को हत्या और एक को बलात्कार के अपराध में दोषी ठहराया गया था. इनमें से एक अभियुक्त 16 वर्षों से अधिक समय से जेल में है, जबकि अन्य अभियुक्त भी 11 से अधिक 14 वर्षो तक कि वास्तविक सजा भुगत रहे है.
-भारत एक्सप्रेस
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