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ट्रायल कोर्ट ने दी फांसी, हाईकोर्ट ने उम्रकैद में क्यों बदली सजा? नाबालिग से रेप और हत्या का मामला

Allahabad High Court: नाबालिग से दुष्कर्म व हत्या के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है. जानिए इसके पीछे का क्या कारण है?

Allahabad High Court converted death sentence into life imprisonment

इलाहाबाद हाईकोर्ट

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म व हत्या के अभियुक्त को दी गई फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि सजा भुगत रहा व्यक्ति आपराधिक पृष्ठभूमि का नहीं है. यह नहीं कहा जा सकता कि वह सुधरने योग्य नहीं है और समाज के लिए खतरा है. उसे सुधरने व पुनर्वास का मौका मिलना चाहिए. यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता तथा न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने फिरोजाबाद के युवक की अपील पर दिया.

फिरोजाबाद के युवक के खिलाफ 17 मार्च 2019 को आठ वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म व हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज कराया गया था. पीड़िता पड़ोस में गई थी और वहां से लापता हो गई. पीड़िता की मां को ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने उसकी बेटी को आरोपी के साथ देखा था. 18 मार्च 2019 को पीड़िता का शव गेहूं के खेत में मिला.

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी फांसी

ट्रायल कोर्ट ने इसे भयावह घटना माना और कहा कि आरोपी पीड़िता को बिस्किट दिलाने के बहाने फुसलाकर खेत में ले गया और उससे जबरन दुष्कर्म किया और हत्या कर दी. कोर्ट ने युवक को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई. सजा के खिलाफ हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में अपील व रिफरेंस आया.

आरोपी ने क्या तर्क दिया?

आरोपी की ओर से कहा गया डीएनए जांच के लिए गए नमूनों को फोरेंसिक जांच लैब में कभी नहीं भेजा गया. पीड़िता रिश्ते में उसकी बहन लगती थी इसलिए उसके खिलाफ इस तरह का नृशंस कृत्य करने का कोई कारण नहीं था. केवल पीड़िता के साथ आखिरी बार देखे गए सबूत ही हैं जो किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए निर्णायक नहीं है.

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पुलिस की दलील क्या है?

शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि कि पीड़िता को आखिरी बार आरोपी के साथ देखा गया था. ऐसे में आरोपी साक्ष्य अधिनियम के तहत यह बताने के लिए बाध्य है कि उसके बाद पीड़िता के साथ क्या हुआ लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहा. इस प्रकार यह दोषसिद्धि का एक उचित मामला है.

कोर्ट ने फांसी को उम्रकैद में बदला

हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि एक बार तथ्यों के गवाहों के साक्ष्य से अंतिम बार देखे जाने का तथ्य साबित हो जाने के बाद अभियुक्त पर यह साबित करने का भार था कि उसने पीड़िता को कहां और कब छोड़ा. कोर्ट ने कहा कि अपीलार्थी यह बताने में विफल रहा इसलिए ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है. साथ ही अपीलार्थी की कम उम्र और अंतिम बार एकसाथ देखे जाने के परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित मामले को देखते हुए मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया.



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