छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 4 जुलाई को सुनवाई करेगा. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई करेगी. वहीं भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ओर से दायर जमानत याचिका पर भी कोर्ट सुनवाई करेगा. बघेल की ओर से दायर याचिका में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी गई है.
याचिका में उठाया गया सवाल
याचिका में सवाल उठाया गया है कि सीबीआई और ईडी को छत्तीसगढ़ में जांच करने का अधिकार किस आधार पर मिला, जब राज्य सरकार ने पहले ही उनकी आम सहमति को वापस ले लिया था. भूपेश बघेल ने याचिका में मांग की है कि उन्हें इन मामलों में किसी भी तरह से गिरफ्तार न किया जाए और जांच में सहयोग करने का अवसर दिया जाए.
भूपेश बघेल ने अपने पुत्र की गिरफ्तारी का किया जिक्र
उन्होंने अपने पुत्र चैतन्य की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा है कि जैसे चैतन्य को ईडी ने शराब घोटाले में कमीशन लेने का झूठा आरोप लगाते हुए राजनीतिक विद्वेष की भावना से गिरफ्तार किया है. उसी तरह ईडी उन्हें भी गिरफ्तार कर सकती है. उनको व परिवार को जिस तरह जांच के नाम पर परेशान किया जा रहा है यह राजनीतिक प्रतिद्वंदिता ही है. जांच के नाम पर राजनीतिक प्रतिशोध की भावना खुलकर सामने आ रही है.
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भूपेश बघेल और उनके बेटे के खिलाफ चल रही जांच
बता दें कि भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ 2161करोड़ के कथित शराब घोटाले के मामले में जांच चल रही है. दरअसल सीबीआई ने महादेव बेटिंग एप मामले में भूपेश बघेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रखा है. सीबीआई द्वारा दर्ज इस एफआईआर में बघेल का नाम छठें नंबर पर है. एफआईआर में बेटिंग एप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत 21 आरोपियों के नाम शामिल है.
मामले में सीबीआई 60 जगहों पर कर चुकी है छापेमारी
इस मामले में सीबीआई 60 जगहों पर छापेमारी कर चुकी है. इसमें ऐप के प्रमोटर रवि उप्पल, सौरभ चंद्राकर, शुभम सोनी और अनिल अग्रवाल के अलावा छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल का नाम शामिल है. रवि उप्पल को भी पिछले साल दुबई से गिरफ्तार किया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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