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हाईकोर्ट की सख्ती: वकीलों की हड़ताल पर सुनवाई टालना न्यायिक कदाचार, एसडीएम को कारण बताओ नोटिस जारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई टालने को न्यायिक कदाचार करार दिया है. कोर्ट ने अलीगढ़ के एसडीएम को फटकार लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया.

Allahabad High Court
Edited by Akansha

प्रयागराज: प्रयागराज से एक अहम खबर सामने आई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वकीलों की हड़ताल के कारण किसी मामले की सुनवाई टालना न्यायिक कदाचार की श्रेणी में आता है. कोर्ट ने यह टिप्पणी अलीगढ़ के एक उप-जिलाधिकारी (SDM) के खिलाफ की है.

एसडीएम को कारण बताओ नोटिस जारी

कोर्ट ने पाया कि अलीगढ़ के एसडीएम ने 25 जुलाई को वकीलों की हड़ताल के चलते मामले की सुनवाई स्थगित कर दी थी. इस पर न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर ने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा— “क्यों न उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए?”

याचिकाकर्ता ने की थी बहाली की मांग

यह मामला सत्यपाल सिंह द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है. उन्होंने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत बहाली के लिए आवेदन किया था. 25 जुलाई को सुनवाई तय थी, लेकिन वकीलों की हड़ताल के कारण इसे 27 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया.

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बार एसोसिएशन के दबाव में फैसला गलत: कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि किसी भी बार एसोसिएशन के आह्वान पर न्यायिक अधिकारी का इस तरह पेश आना पूरी तरह अवैध है. ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मानकों के भी खिलाफ है. कोर्ट ने दो टूक कहा कि कोर्ट को कानून के अनुसार कार्य करना चाहिए, न कि किसी बाहरी दबाव में.

पद से हटाने तक की कार्रवाई संभव

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि यदि कोई न्यायिक अधिकारी इस तरह बार के दबाव में काम करता है, तो यह आचरण दोष (misconduct) माना जाएगा. इस पर पद से हटाने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है. इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और मर्यादा को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है. यह संदेश देता है कि न्यायिक कार्य बाधित नहीं किया जा सकता, चाहे कोई भी कारण हो. कोर्ट का रुख साफ है कानून से ऊपर कोई नहीं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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