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तेलंगाना के एमबीबीएस दाखिलों में डोमिसाइल कोटा नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना की MBBS डोमिसाइल कोटा नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. राज्य सरकार की चार साल की शैक्षणिक योग्यता शर्त पर कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं, खासकर उन छात्रों के लिए जो मूलतः तेलंगाना से हैं लेकिन पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में गए.

Supreme Court

तेलंगाना के एमबीबीएस दाखिलों में डोमिसाइल कोटा नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने सभी पक्षकारों को 8 अगस्त तक लिखित जवाब देने को कहा है. तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि डोमिसाइल कोटा का लाभ पाने के लिए तेलंगाना में चार साल तक पढ़ाई या निवास करने की आवश्यकता नहीं है.

तेलंगाना सरकार ने 2017 के मेडिकल और डेंटल कॉलेज प्रवेश नियमों (जो 2024 में संशोधित किए गए) के तहत राज्य कोटे में केवल उन्हीं छात्रों को पात्र माना था, जिन्होंने कक्षा 12 तक लगातार चार वर्षों तक राज्य में पढ़ाई की हो.

डोमिसाइल तय करना कोर्ट का नहीं, राज्य का अधिकार – सिंघवी

मामले की सुनवाई के दौरान तेलंगाना सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिंघवी ने कहा कि डोमिसाइल का नियम एक वैध सरकारी आदेश और राष्ट्रपति की अधिसूचना पर आधारित है, और स्थायी निवासी की परिभाषा तय करना अदालतों के नहीं बल्कि राज्य सरकार का अधिकार है. उन्होंने कहा कि किसी भी डोमिसाइल नीति में कोई न कोई थ्रेशोल्ड तो आवश्यक होता है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, कई छात्र पढ़ाई के लिए कोटा जैसे शहरों में जाते हैं. क्या इसका मतलब है कि उन्हें डोमिसाइल का लाभ नहीं मिलेगा? हम नहीं चाहते कि ऐसे छात्रों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाए.

छात्रों की स्थिति पर कोर्ट ने जताई चिंता

कोर्ट ने यह भी पूछा था कि उन लोगों का क्या होगा जो तेलंगाना के मूल निवासी थे, लेकिन राज्य विभाजन के बाद नौकरी के कारण आंध्र प्रदेश चले गए? कोर्ट ने तेलंगाना सरकार को चेतावनी दी थी कि या तो इस मुद्दे का समाधान निकाला जाए वरना कोर्ट आदेश पारित करेगा. कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश चले गए, लेकिन तेलंगाना में ही निवास बनाए रखा.
कोर्ट ने पूछा था कि उन लोगों का क्या जिनके माता-पिता तेलंगाना से हैं, लेकिन नौकरी के लिए वहां चले गए. यह पहली बार नहीं है जब यह मामला न्यायिक जांच के दायरे में आया है

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भारत एक्सप्रेस


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