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फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, ब्रिगेडियर उस्मान और मेजर सोमनाथ शर्मा NCERT पाठ्यक्रम में शामिल, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

Sam Manekshaw: भारत सरकार ने आजाद भारत के तीन महत्वपूर्ण सेना नायकों फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और मेजर सोमनाथ शर्मा को NCERT पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा की है.

Sam Manekshaw

Sam Manekshaw: भारत सरकार ने आजाद भारत के तीन महत्वपूर्ण सेना नायकों फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और मेजर सोमनाथ शर्मा को NCERT पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा की है. ये सभी सेना नायक अपनी बहादुरी और बेमिसाल नेतृत्व क्षमता के लिए जाने जाते हैं.

इस संबंध में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने एक विज्ञप्ति जारी की. जिसके अनुसार इन सेना नायकों के बारे में कक्षा 8 (अंग्रेजी), कक्षा 8 (उर्दू) और कक्षा 7 (उर्दू) में पढ़ाया जाएगा.

छात्रों को प्रेरणादायक कहानियों के बारे में दी जाएगी जानकारी

जिसका मुख्य उद्वेश्य छात्रों को साहस और कर्तव्य की प्रेरणादायक कहानियों के बारे में जानकारी देना है. आइये जानते हैं कि ये तीनों सेना नायक कौन हैं और इन्होंने भारतीय सेना में कौन सी भूमिका निभाई थी.

फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ

सैम मानेकशॉ को भारत का पहला फील्ड मार्शल होने का गौरव प्राप्त है. उन्हें आधुनिक भारतीय सेना के इतिहास में सबसे प्रभावशाली सैन्य लीडर कहा जाता है.

देश के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ ने 5 प्रमुख युद्धों जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध, 1947-48 पाकिस्तान युद्ध, 1962 चीन युद्ध, 1965 भारत-पाक युद्ध और 1971 भारत-पाक युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी.

बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद कराने में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की अहम भूमिका मानी जाती है. यह उनके रणनीतिक नेतृत्व का ही परिणाम था.

ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान

ब्रिगेडियर उस्मान को “नौशेरा का शेर” कहा जाता है. उन्होंने भारतीय सेना में एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में अपनी भूमिका निभाई. 1947-48 के भारत पाकिस्तान जंग में मोहम्मद उस्मान एक जबरदस्त साहसिक अभियान का नेतृत्व करते हुए जम्मू-कश्मीर के झांगर और नौशेरा को पाकिस्तान के कब्जे से आजाद कराया.

इसलिए उन्हें नौशेरा का शेर की उपाधि दी गई थी. इस युद्ध में ब्रिगेडियर उस्मान 3 जुलाई 1948 को शहीद हो गए थे. जिसकी वजह से उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया. उनके अंतिम संस्कार में लॉर्ड माउंटबेटेन और जवाहरलाल नेहरू भी शामिल हुए थे.

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मेजर सोमनाथ शर्मा

1947-48 के भारत पाकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले मेजर सोमनाथ शर्मा को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया. आजाद भारत के इतिहास में पहला परमवीर चक्र पाने वाले सैनिक मेजर सोमनाथ शर्मा ही थे. श्रीनगर हवाई अड्डे के पास पाकिस्तानी घुसपैठियों से लड़ते हुए मात्र 25 साल की आयु में सोमनाथ शर्मा ने अपनी जान गंवा दी थी.

उन्होंने बड़गाम की लड़ाई में वीरता पूर्वक पाकिस्तानी घुसपैठियों का मुकाबला किया और कश्मीर घाटी को भारत के लिए सुरक्षित करने में अहम भूमिका निभाई. इससे पहले द्वितीय विश्व युद्ध में उन्होंने बर्मा में भी अपनी सेवाएं दी थी.

– भारत एक्सप्रेस



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