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दिल्ली हाई कोर्ट महिला वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस गंजू के ट्रांसफर मामले में न्याय की गुहार लगाई

दिल्ली हाई कोर्ट की 66 महिला वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई को पत्र लिखकर जस्टिस तारा वितस्ता गंजू के कर्नाटक हाई कोर्ट ट्रांसफर पर पुनर्विचार की मांग की है.

Delhi High Court

दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) की 66 महिला वकीलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई को पत्र लिखा है. महिला वकीलों द्वारा लिखे गए पत्र में दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस तारा वितस्ता गंजू को दिल्ली हाई कोर्ट से कर्नाटक हाई कोर्ट ट्रांसफर करने के कॉलेजियम के सिफारिश पर पुनर्विचार करने की मांग की है. हालही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस तारा वितस्ता गंजू को कर्नाटक हाई कोर्ट ट्रांसफर करने की सिफारिश की है. जिन महिला वकीलों ने पत्र लिखा है. उसमें वरिष्ठ वकील अरुंधति कट्जू, गीता लूथरा, मालविका राजकोटिया, स्वाति सु कुमार, दिया कपूर, मालविका त्रिवेदी और कादंबरी सिंह सहित अन्य वकील शामिल है.

युवा वकीलों को देती हैं प्रोत्साहन

महिला वकीलों ने पत्र में लिखा है कि जस्टिस गंजू उच्चतम पेशेवर ईमानदारी वाली जज है और उनका रिकॉर्ड काफी अच्छा है. उन्होंने कहा कि गंजू का केस निपटारा करने की दर सबसे ज्यादा है और यह युवा वकीलों को प्रोत्साहित करती हैं. पत्र में कहा गया है कि जस्टिस गंजू दिल्ली हाई कोर्ट में सम्मानित जज है. उन्होंने हमेशा निष्पक्षता और निष्ठा के साथ न्याय किया है. युवा वकीलों को प्रोत्साहन देती हैं और लंबित मामलों को तेजी से निपटाती है. महिला वकीलों ने यह भी कहा है कि जजों के तबादलों को लेकर पारदर्शिता की कमी है, जिससे अफवाहें फैलती हैं और संस्थागत ईमानदारी पर असर पड़ता है. अगर जजों के तबादला किया जाता है तो उनके साथ-साथ उनके बार को भी ठोस कारण बताए जाने चाहिए.

हम जस्टिस गंजू के स्थानांतरण का विरोध करते है और आग्रह करते हैं और इसपर पुनर्विचार किया जाए. साथ ही, पारदर्शी प्रक्रिया बनाई जाए, जिससे संस्थागत विश्वसनीयता बनी रहे. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के दो जजों के तबादले की सिफारिश की थी. जस्टिस तारा वितस्ता गंजूको कर्नाटक हाई कोर्ट और जस्टिस अरुण मोंगा को राजस्थान हाई कोर्ट भेजने का प्रस्ताव है. इससे पहले भी दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने 1 सितंबर को सीजेआई बी आर गवई और कॉलेजियम को पत्र लिखकर लगातार हो रहे जजों के तबादलों पर चिंता जताई थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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